बरेली। जिला प्रशासन ने यह तो ठान ली है कि त्रिशूल एयरबेस के चारों ओर रिंग रोड बनाई जाएगी। इस जद में आ रहे भवनों को बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया जाएगा। जिससे वायु सेना के अधिकारी एयरबेस की सुरक्षा की दृष्टि से पेट्रोलिंग कर सकें। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह पैदा हो रहा है कि 50 मीटर तक प्रतिबंधित क्षेत्र में बने भवनों को कैसे ध्वस्त किया जाए। ऐसे करीब दो हजार भवन 10 फरवरी तक शायद ही चिह्नांकित हो पाएंगे, क्योंकि तहसील का अधिकतर स्टाफ राजस्व परिषद के अध्यक्ष के आगमन की तैयारियों में जुटा हुआ है।
10 फरवरी के बाद इन भवनों का चिह्नांकन होने के बाद उनको ध्वस्त करना आसान नहीं होगा। जिले से लेकर शासन का अभी से इन मकानों को यथावत बनाए रखने का दबाव बन रहा है। इसलिए इस मामले में अधिकारी ज्यादा नहीं बोल रहे हैं लेकिन जांच पड़ताल तो गंभीरता से हो रही है कि जो मकान बने हैं उनमें कौन कौन रह रहे हैं। किराएदार कौन हैं और मकानों में रहने वालों का चाल चलन कैसा है।
बरेली विकास प्राधिकरण के अभियंता, ड्राफ्टमैन तथा अन्य स्टाफ की तीन टीमों का सर्वे दो दिन में पूरा हो जाएगा। यह टीम अवैध मकानों का सर्वे कर रही है। अब तक के सर्वे में करीब चार सौ मकानों को अवैध करार दिया है। दो तीन दिन दिनों सर्वे होने की पूरी संभावना है। वहीं दूसरी ओर तहसील की टीम इन मकानों में रहने वाले परिवारों की जन्म कुंडली तलाश रही है। जिसमें रहने वाले व्यक्ति, किराएदार और उनका चरित्र कैसा है। इनमें से किसी के ऊपर अपराधिक मुकदमा तो नहीं है। इन परिवारों में से किस-किस की पाकिस्तान में रिश्तेदारियां हैं। खाड़ी देशों में नौकरी करने वाले तो नहीं हैं। अपने तो बिहार और बंगाल का बताने वालों के परिवारों का वहां के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से सत्यापन कराने का फैसला लिया है।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अपने को बंगाल या बिहार का बताने वाले पाकिस्तान के लोग हो सकते हैं, जो कि बंगलादेश के माध्यम से बरेली आ गए होंगे। जिस तरह से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट इजाज बरेली रहकर सेना के अंदर से फोटोग्राफ एकत्रित कर रहा था।
‘प्रशासन की पहली प्राथमिकता त्रिशूल एयरबेस के चारो ओर रिंग रोड बनवाने की है। जिससे कि पेट्रोलिंग करने में आसानी हो।’ गौरव दयाल, डीएम