पीलीभीत। डीएम आवास से सटी कराड़ों की शत्रु संपत्ति रसूखदारों को खैरात में देने का मामला संज्ञान में आने के बाद एक नई बात सामने आई है। करोड़ों की जमीन टाइप सेंटर चलाने वाले कामेश्वर नाथ के नाम दर्ज कराई गई। कामेश्वर की मौत के बाद उनके बेटे और पत्नी से उस भूमि को दान के रूप में प्राप्त करने को बैनामा कराया गया। इसकी बकायदा डीड बनाई गई ताकि भविष्य में कभी भी यह लोग बैनामा निरस्त न करा सकें।
बता दें कि अफसरों की जांच के बाद से रसूखदरों को दी गई जमीन से जुड़े मामले में रोजना नया खुलासा होने से अफसर भी हैरान हैं। ध्यान योग केंद्र की आड़ में विनायक चेरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश जायसवाल और परविंदर सिंह सैहमी के नाम कराए गए बैनामे की जब जांच पड़ताल की गई, तो पता चला कि जमीन शत्रु संपत्ति है। रसूखदारों ने 2011 में डोरी लाल मोहल्ला निवासी टाइप सेंटर चलाने वाले जिस कामेश्वरनाथ के बेटे विकास नाथ और उनकी पत्नी मंजू नाथ से जमीन दान में ली है, उसमें सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर टाइप सेंटर चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाले कामेश्वर नाथ के नाम करोड़ों की बेशकीमती जमीन कहां से आई और फिर उनके निधन के बाद उनके बेटे और पत्नी ने करोड़ों की इस जमीन को किस मंशा से दान कर दिया। जबकि विकास आज भी टाइप सेंटर ही चला रहे हैं।
दानकर्ता मंजूनाथ की करीब सात माह पूर्व मौत हो चुकी है। रजिस्ट्री कार्यालय से मिले साक्ष्यों के बाद जब इस प्रकरण में विकास नाथ से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि जमीन कब, किसे और क्यों दी गई इस बारे में रिश्तेदारों से जानकारी करने के बाद ही कुछ बता सकेंगे। इधर, सूत्रों की मानें तो कामेश्वर की फोटो स्टेट की दुकान काफी पुरानी है। उनके समय में पुरानी तहसील में कार्यरत अधिकांश राजस्व कर्मी टाइपिंग,फोटो स्टेट आदि का कार्य यहीं कराते थे। समझा जा रहा है कि इस पूरे घोटाले की पटकथा राजस्व कर्मियों की साठगांठ से टाइपिंग सेंटर पर ही लिखी गई।
रसूखदारों ने विकास और उनकी मां मंजूनाथ से कराए हैं तीन अलग-अलग बैनामे
शत्रु संपत्ति हथियाने वाले रसूखदारों ने विकासनाथ और उनकी मां मंजूनाथ से तीन अलग-अलग बैनामे कराए हैं। एक बैनामा विनायक चैरेटेबिल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश जायसवाल और ट्रस्टी परविंदर सिंह सैहमी के नाम हुआ है। गाटा संख्या 92 /2, रकवा 0.291 हेक्टेयर जमीन दान में दी गई है। इस जमीन पर 248800 रुपये मूल्य के यूकेलिप्टस के 48 और सेमल के 28 पेड़ खड़े होने की बात भी बैनामे में दर्ज है।
दूसरा बैनामा गाटा संख्या 88/1 रकवा 0.405 हेक्टेयर जमीन का विनायक ऐसोसिएट के सतीश जायसवाल, एसपीएस संधू और दुर्गादास राजानी के नाम किया गया है। यह बैनामा भी विकासनाथ और उनकी मां मंजूनाथ ने किया है, लेकिन यह जमीन दान में नहीं दी गई है। जमीन का यह भाग दान में दी गई जमीन के ठीक पीछे है। इस पर एसोसिएट के लोगों की मंशा कॉलोनी डेवलप करने की थी। इस जमीन पर भी 51.5 लाख कीमत के सेमल के 41 पेड़ खड़े होने की बात बैनामे में लिखी गई है।
तीसरा बैनामा भी विकासनाथ और मंजूनाथ ने गाटा संख्या 91 और 92 /1 रकवा 0.563 हेक्टेयर जमीन का भी विनायक एसोसिएट के अनिल कुमार अग्रवाल, गुरदित्त सिंह सैहमी और दुर्गादास राजानी के नाम किया है। यह जमीन भी दान नहीं की गई है। इसका उपयोग भी कॉलोनी के लिए किया जाना था।
वन विभाग के अफसरों ने डीएम को किया गुमराह
शुरू में जब इस जमीन को ग्रीन बेल्ट की मानकर जांच कराई गई तब इस पर खड़े पेड़ों को बिना परमीशन काटने का मुद्दा उठा था। प्रशासन ने इस मामले में जांच वन विभाग से कराई तो अपनी गर्दन बचाने के लिए गलत तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट दे दी गई। वन विभाग के अफसरों का कहना था कि जमीन पर अमरूद के ही सिर्फ दो-चार पेड़ खड़े थे, उन पर भी फल नहीं आते थे। दावा किया गया था कि इन्हीं अमरूद के पेड़ों को काटा गया था, जबकि बैनामा में न केवल पेड़ों की वास्तविक संख्या लिखी है बल्कि उनकी कीमत भी दर्ज है। प्रशासन ने वन विभाग के गलत रिपोर्ट देने को भी गंभीरता से लिया है और इसे भी जांच में शामिल कर लिया है।
अगर शत्रु संपत्ति का बैनामा कराने की बात जांच में सामने आ चुकी है, तो यह गंभीर आपराधिक मामला है। इसमें आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए। हालांकि यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं डीएम पीलीभीत से आज ही इस बारे में बात करके पूरे मामले की जानकारी लूंगा और उन्हें सख्त कार्रवाई करने के लिए कहूंगा।
-रणवीर प्रसाद, मंडलायुक्त, बरेली