बरेली/आंवला। नोटबंदी के दौरान बिशारतगंज निवासी व्यक्ति के खाते से छह लाख की रकम खुद डाकपाल ने फर्जी विड्राल फार्म भरकर निकाली थी। जांच में विड्राल फार्म पर डाकपाल की हैंड राइटिंग मिली है। इस धोखाधड़ी में दो उपडाकपाल भी शामिल थे। डाक विभाग के एसडीआई वेस्ट की जांच ये तथ्य सामने आने के बाद अलीगंज थाने में मंगलवार को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। तीनों आरोपी शिकायत के बाद से ही निलंबित चल रहे हैं।
डाक विभाग के एसडीआई वेस्ट धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि छह महीने पहले बिशारतगंज निवासी नानकराम सागर ने डाकपाल ललित कुमार और दो उप डाकपाल बनवारी लाल, उमेश बाबू पर आरोप लगाया था कि तीनों ने सांठगांठ कर उसके खाते से छह लाख बीस हजार आठ सौ रुपये निकाल लिए हैं। उस समय अलीगंज क्षेत्र में कुंडलिया फैजुल्लापुर की शाखा पर डाकपाल ललित कुमार तैनात थे। शिकायत मिलने के बाद तीनों आरोपियों को सस्पेंड कर दिया गया था और विभागीय जांच बैठा दी गई थी। एसडीआई वेस्ट की जांच में आरोप सही पाए गए हैं। तीनों आरोपियों ने फर्जीवाड़ा किया था। एसडीआई वेस्ट ने बताया कि रकम निकालने के लिए विड्राल फार्म डाकपाल ने अपने हाथ से भरे थे और दोनों उप डाकपालों ने हस्ताक्षर का मिलान किए बगैर रकम निकाली थी। मंगलवार को तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अलीगंज थाने में तहरीर दी गई, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हो पाया। एसओ अलीगंज मनोज मिश्रा ने बताया कि कप्तान के लिखित आदेश हैं कि धोखाधड़ी का मुकदमा बिना उनकी इजाजत के न लिखा जाए, इसलिए रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी।
ये था मामला
शिकायतकर्ता नानकराम सागर ने बताया कि नोटबंदी के दौरान स्थानीय कस्बे की बैंकों में खाता खुलने में परेशानी होने पर उन्होंने डाकपाल ललित कुमार के कहने पर अपने, पत्नी, बेटों और बेटी के नाम से खाते खुलवाकर दो 49-49 हजार की एक साल की लिए एफडी और बचत खाते में नोट जमा करवाए थे। कुल छह खातों में छह लाख बीस हजार आठ सौ रुपये जमा कराए गए थे। नानकराम ने शिकायत की थी कि उनके छह अलग-अलग खातों से स्थानीय शाखा डाकपाल ने रुपये निकाल लिए हैं।