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घरवाले बोले- घर से बुलाकर मार डाला कपिल-अशोक को

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बरेली। अहलादपुर में हुई पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठने लगे हैं। मारे गए गए कथित बदमाश कपिल और अशोक के घरवालों ने एनकाउंटर को पूरी तरह फर्जी बताते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस दोनों को एक दिन पहले बहाने से अपने साथ लाई थी। विनोद के घरवालों के मुताबिक उसके खिलाफ किसी थाने में एक एनसीआर तक दर्ज नहीं है, लेकिन पुलिस ने उसे सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि वह कपिल का दोस्त था। दोनों परिवारों ने चेतावनी दी कि अगर इस मुठभेड़ की सीबीआई जांच न कराई गई तो वे मुख्यमंत्री के कार्यालय और आवास पर धरना शुरू करेंगे।
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पुलिस के हाथों मारा गया कपिल संभल के असमोली थाना क्षेत्र के गांव एचबाड़ा का मूल निवासी था। मुठभेड़ में उसके मारे जाने की सूचना पर यहां पहुंचे उसके भाई सुरेंद्र और साले कुलदीप आदि ने बताया कि छह जनवरी की दोपहर दो बजे सादा वर्दी में पांच पुलिस वाले बोलेरो गाड़ी से उनके घर पहुंचे थे। उनके साथ कपिल का दोस्त पड़ोस के ही गांव चितावली का निवासी अशोक भी था। अशोक कई साल से गाजियाबाद के इंदिरापुरम के कनावनी गांव में रह रहा था। पुलिसवालों में एक अमरोहा में तैनात रहा था और कपिल का पुराना परिचित था। आरोप है कि कपिल के पूर्व परिचित पुलिस वाले ने उससे कहा कि अमरोहा में हुई एक लूट खुल नहीं पा रही। वह अपने पुराने संपर्कों के जरिये पुलिस की मदद कर सकता है। कपिल पुलिस की मदद करने के लिए उनके साथ चला गया। सोमवार रात नौ बजे बरेली पुलिस ने उसके मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना दी।
अशोक के भाई विनोद का कहना था कि रविवार सुबह अशोक को किसी ने कॉल कर कपिल से मदद कराने को कहा था। इसके बाद अशोक साढ़े दस बजे भाई राजकुमार की होंडा सीबी शाइन बाइक से घर जाने के लिए निकला। रास्ते में उसे कौन मिला यह पता नहीं लग पाया। विनोद ने आशंका जताई कि शायद उसके भाई की बाइक पुलिस ने कब्जे में ले ली जो बाद में मुठभेड़ में मौके पर दिखाई गई। पुलिस उसे गाड़ी से कपिल के गांव ले गई। इस बीच उन लोगों ने उसे कई बार कॉल की लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। रात में न्यूज देख रहे उनके बेटे ने बताया कि ताऊ को पुलिस ने मार दिया है। विनोद ने कहा कि उनके भाई अशोक के खिलाफ कहीं कोई एनसीआर तक दर्ज नहीं है। साफ तौर पर उसकी हत्या की गई है। वे लोग हत्या करने वाले पुलिस वालों को सजा दिलाने के लिए सीएम से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे।
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