मेला ककोड़ा के जाम में
फंसे गुड़ व्यापारी की मौत
हालत बिगड़ी तो साढ़े तीन घंटे तक नहीं मिल सका उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज (बदायूं)। ककोड़ा मेला और कादरचौक के बीच जाम में फंसे नगर के गुड़ व्यापारी की जान चली गई। वह करीब साढ़े तीन घंटे परिवार के साथ जाम में अटके रहे और इस बीच कई कोशिशों के बाद भी सही उपचार नहीं मिल सका। देर शाम शव घर लाया गया तो कोहराम मच गया।
नगर में कांसपुर रोड निवासी रतनलाल गुप्ता (65) प्रतिष्ठित गुड़ व्यापारी थे। शनिवार को वह परिवार के सदस्यों के साथ डीसीएम से मेला ककोड़ा गए थे। वहां उन लोगों ने तंबू लगाया था और एक-दो दिन भागीरथी किनारे कल्पवास का करना था। बड़े पुत्र अवनीश के मुताबिक पिता शुगर के मरीज थे। शनिवार दोपहर मेले में उनकी हालत बिगड़ी तो घाट किनारे मौजूद एक निजी चिकित्सक को दिखाया गया। डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया तो उन्हें आराम मिल गया। इसके बाद काफी देर तक वह बाबा देवादास के भंडारे में बैठे रहे। फिर तंबू में आ गए। तबीयत फिर खराब हुई तो घरवालों ने तंबू समेटकर घर चलने का फैसला कर लिया। डीसीएम मेले से थोड़ा आगे बढ़ते ही जाम में फंस गई। इस बीच रतनलाल गुप्ता की हालत और बिगड़ने लगी। करीब साढ़े तीन घंटे डीसीएम नहीं निकल सकी।
अवनीश ने बताया कि उनके कुछ आगे एसडीएम दातागंज की गाड़ी भी जाम में फंसी थी। वह मदद मांगने गए पर एसडीएम खुद असहाय नजर आए। तब किसी ने बताया कि नौली गांव होकर उसहैत की ओर निकल जाएं। गांव के संकरे रास्ते से किसी तरह वह उसहैत पहुंचे। वहां निजी डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रात आठ बजे शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। नगर के कई लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। अवनीश ने बताया कि वह पोस्टमार्टम या कोई अन्य कार्रवाई नहीं कराना चाहते पर इतना जरूर कहते हैं कि जाम में न फंसते या सही उपचार मिल जाता तो उनके पिता की जान बच सकती थी।
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कई लोगों की हालत बिगड़ी
घंटों के जाम और उमस ने कई लोगों की हालत बिगाड़ दी। दिनभर लगे जाम की वजह से मेले जाते और आते वक्त लोगों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा, जिससे कइयों की हालत बिगड़ी। इनमें बुजुर्ग और बच्चों की नहीं युवक भी शामिल रहे। यहां शहर में लालपुल के पास दुकान चलाने वाले मनोज शनिवार को परिवार समेत मेला ककोड़ा गंगा स्नान करने गए थे। मनोज के मुताबिक जाम होने की वजह से उन्हें 18 किलोमीटर जाते वक्त और इतना ही लौटते वक्त पैदल चलना पड़ा। इससे उनकी हालत बिगड़ गई। इस अव्यवस्था के लिए मनोज बार-बार प्रशासन और पुलिस को कोस रहे थे।