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विश्वविद्यालय जांच लटकाता है और शोहदे देते हैं धमकियां

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बरेली। बड़े साहब की खिदमत करने वाले एक कर्मचारी के बेटे के को एमएससी की छात्रा के साथ छेड़खानी के मामले में बचाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी साख को ताक पर रख दिया था। इस मामले को दबाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। मामले की छानबीन के लिए गठित समिति छात्र को दोषी मानते हुए जांच ग्रीवांस सेल को सौंपने की संस्तुति कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रॉक्टोरियल बोर्ड मामले को दबाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। जांच कराने के लिए पत्र तक ग्रीवांस सेल को नहीं भेजा गया है। अब सूत्र बता रहे हैं कि जो फाइल ग्रीवांस सेल को भेजी जानी थी, उस फाइल को ही गायब कर दिया गया है।
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एमएससी की छात्रा से छेड़छाड़ की घटना को दो सप्ताह से ज्यादा हो चुके हैं। पीड़ित ने शिकायत की तो उसे धमकाकर मामला मारपीट में बदलवा दिया गया। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना गला बचाने के लिए जांच समिति को मामला भेज दिया। प्रारंभिक जांच में छात्र दोषी पाया गया तो समिति ने मामला ग्रीवांस सेल को भेजने की संस्तुति कर दी। मगर अब प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने फाइल दबा रखी है। जो पत्र चंद मिनटों में ग्रीवांस सेल के कार्यालय पहुंच सकता था वो अब तक नहीं पहुंचा। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर बीआर कुकरेती का कहना है कि पत्र सेल को भेजा गया था। सवाल यह है कि पत्र कहां गायब हो गया, इस पर कोई जुबान खोलने को तैयार नहीं हैं।

छेड़खानी पर पहले से बंद हैं आंखें
पिछले साल इंजीनियरिंग की छात्रा के अश्लील फोटो वायरल होने का मामला सामने आया था। जांच समिति ने रिपोर्ट दी, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। उससे पहले छात्राओं पर अश्लील शायरी लिखकर व्हाट्सएप पर शेयर की गई थी। उसकी भी जांच हुई, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं। एमएससी की छात्रा के साथ एक आउट साइडर ने क्लास में घुसकर छेड़छाड़ की थी। वो मामला भी दब गया। मुख्य गेट पर एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ हुई थी। वो मामला भी कागजों में दफन हो गया। अब एक और मामला दबाने की कोशिश हो रही है।
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हमारे पास अब भी जांच के लिए पत्र नहीं आया है। पत्र आते ही जांच शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. तूलिका सक्सेना, कोआर्डिनेटर ग्रीवांस सेल

ग्रीवांस सेल के नाम यूजीसी के पोर्टल पर 58 मामले
यूजीसी के सख्त फरमान है कि छात्राओं से जुड़ी शिकायतें ग्रीवांस सेल में दर्ज कराई जाएं। ग्रीवांस सेल जांच करे और मामला सही होने पर कार्रवाई करे, लेकिन विश्वविद्यालय इस मामले में फिसड्डी है। यूजीसी के ग्रीवांस सेल पोर्टल पर विश्वविद्यालय के नाम 58 मामले दर्ज हैं। निस्तारण की सूची में विश्वविद्यालय सबसे पीछे हैं। लंबे समय से विश्वविद्यालय ने कोई मामला ही निस्तारित नहीं किया। शायद यही वजह है कि विश्वविद्यालय ग्रीवांस सेल में यह मामला नहीं देना चाहता। क्योंकि यूजीसी समय-समय में रिपोर्ट भी मांगता है।

गोपनीय शिकायत के इंतजाम क्यों नहीं
विश्वविद्यालय में कई बार छात्राओं के साथ ऐसी हरकतें हो चुकी हैं। कैंपस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। कैंपस में गोपनीय तरीके से शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। कई बार आउट साइडर आ जाते हैं। एंट्री के वक्त ऐसे लोगों को रोका जाना चाहिए। - दीपिका, एमएससी

लंबी जांचों से टूट जाता है हौसला
कैंपस में सभी विभागों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। अगर कोई बात हो जाती है तो उसकी लंबी जांच चलती है। अगर सीसीटीवी कैमरे हों तो उससे तुरंत ही स्पष्ट हो जाएगा। सभी विभागों के बाहर एक-एक कैमरा अनिवार्य रूप से लगाया जाए। - लवी जिंदल, एमएससी

सख्त कदम उठाते तो नहीं होतीं ये घटनाएं
घटना चाहें जो हो, हर बार छात्राएं ही क्यों निशाना बनती हैं। घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए होते तो शायद छेड़छाड़ जैसी घटनाएं नहीं होती। आउट साइडरों को रोकने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। - शैली अग्रवाल, एमएससी

छात्राओं की सुरक्षा को हो ठोस व्यवस्था
आईडी कार्ड वालों को ही कैंपस में एंट्री दी जाए। गेट पर एंट्री दर्ज कराई जाए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। कोई घटना होती है तो आरोपी की पहचान में ही वक्त लगा दिया जाता है। कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्थाएं नहीं हैं। - आज्ञा, होटल मैनेजमेंट
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