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स्वामी चिन्मयानंद मामला: तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया छात्रा का मेडिकल परीक्षण

Thu, 12 Sep 2019 04:35 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
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स्वामी चिन्मयानंद (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली छात्रा का बुधवार को जिला महिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पैनल ने मेडिकल परीक्षण किया। लगभग दो घंटे तक चले परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि के लिए स्लाइड के साथ ही प्रेगनेंसी टेस्ट (यूपीटी) के लिए सैंपल लिया गया, जिसे फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। इस दौरान जिला महिला अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
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एसआईटी की टीम के कुछ सदस्य छात्रा को स्थानीय पुलिस की सुरक्षा में दोपहर करीब 12 बजे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। साथ में छात्रा के पिता और भाई भी थे। दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया, जिसमें जिला महिला अस्पताल की सीएमएस अनीता धस्माना, डॉ. इंद्रा राजेश, तिलहर सीएचसी में तैनात डॉ. शालिनी को शामिल किया गया। पैनल में शामिल डॉक्टरों की टीम ने बताया कि मेडिकल परीक्षण के दौरान दुष्कर्म, यूपीटी आदि की सैंपलिंग कर ली गई है, जिसे फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। यहां जो होनी हैं, उनके भी सैंपल सुरक्षित रख लिए गए हैं। उनकी जांच बृहस्पतिवार को होगी।

बता दें कि छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों और पिता की तहरीर को दरकिनार कर चौक कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म की धारा में रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी, बल्कि अपहरण और जान से मारने की धमकी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की। सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के बाद छात्रा ने दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित थाने में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म की अपराध संख्या शून्य पर रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन चौक कोतवाली में उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
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चौक कोतवाली पुलिस ने यह कहकर दुष्कर्म की रिपोर्ट से किनारा कर लिया कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है। छात्रा ने एसआईटी की पूछताछ के बाद मीडिया के सामने खुलकर बोला कि स्वामी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। एक साल तक शारीरिक शोषण करते रहे। स्वामी पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग की। एसआईटी मंगलवार को छात्रा के एसएस कॉलेज स्थित हॉस्टल के रूम में पहुुंची थी, जहां से कुछ साक्ष्यों को एकत्र किया। चूंकि छात्रा ने खुले तौर पर कहा कि उसके साथ स्वामी ने दुष्कर्म किया। इसलिए उसका बुधवार को मेडिकल परीक्षण कराया गया।

तीमारदारों के प्रवेश पर भी थी बंदिश

जिला महिला अस्पताल में छात्रा के मेडिकल परीक्षण के दौरान सुरक्षा के लिए लगाई गई पुलिस टीम ने किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया। एक महिला तीमारदार अपने मरीज के लिए दवा लेकर आई तो उसे गेट के बाहर रोक दिया गया। जब उसने दवा का वास्ता दिया तो गेट पर मौजूद गार्ड खुद दवा लेकर अंदर गया, लेकिन महिला तीमारदार को अंदर नहीं जाने दिया। ऐसे ही और तीमारदार अपने मरीज के लिए फल-फ्रूट लेकर आए थे। उन्हें भी अंदर नहीं जाने दिया गया। दोपहर दो बजे मेडिकल परीक्षण हो जाने के बाद जब छात्रा चली गई, तब पुलिस का पहरा हटा और लोग अंदर गए।
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