रूहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस के अंदर चल रही कैंटीन में दो बच्चे काम कर रहे हैं। इसकी सूचना मिली तो चाइल्डलाइन के साथ श्रम विभाग की टीम मौके पर भी पहुंची। एक बच्चा तो मौके से गायब हो गया। दूसरे बच्चे को छुड़ाने चले तो पता चला कि कैंटीन किसी सपा नेता की है। फिर तो नियमों की बात कहते हुए टीम उल्टे पांव लौट आई। बच्चे का मेडिकल कराने की जिम्मेदारी कैंटीन कर्मियों को ही सौंप दी गई है।
चाइल्ड लाइन को मुंबई मुख्यालय से रूहेलखंड विश्वविद्यालय की कैंटीन में दो बच्चों के काम करने की शिकायत भेजी गई। मुख्यालय से बरेली चाइल्ड लाइन को जानकारी देकर इस पर कार्रवाई करने को कहा। इन बच्चों को यहां से शेल्टर होम ले जाना था। स्थानीय टीम ने श्रम विभाग से इस विषय पर बातचीत की तो कई दिन निकल गए, लेकिन कोई कैंटीन झांकने नहीं गया। बुधवार को अचानक श्रम विभाग की टीम पीलीभीत रोड स्थित विश्वविद्यालय परिसर की कैंटीन में पहुंच गई और काफी देर बाद चाइल्ड लाइन को इस विषय में जानकारी दी। यहां दो बच्चे काम कर रहे थे। 18 साल से कम उम्र का बच्चा तो मौके से गायब हो गया। दूसरे बच्चे की उम्र को लेकर टीम में मतभेद रहा। सूत्रों ने बताया कि टीम मौके पर बच्चे को छोड़कर इसलिए चली गई क्याेंकि कैंटीन भले ही कागजों पर किसी के नाम पर हो, लेकिन इस पर एक सपा नेता का हाथ है। कोई विवाद होता इसलिए बच्चे की पूरी जानकारी लेकर उसे वहीं छोड़ दिया।
- उम्र को लेकर मतभेद
इसमें एक की उम्र 14 वर्ष से कम जबकि दूसरा 18 वर्ष से कम था। चाइल्ड लाइन के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के बच्चों को बालश्रम के अंतर्गत लिया जाता है जबकि श्रम विभाग 14 साल तक के बच्चों को ही बालश्रम के दायरे में लेती है।
- चाइल्डलाइन को करें शिकायत
चाइल्डलाइन हेल्पलाइन 1098 पूरे देश में एक केंद्रीय संस्था चल रही है। यह बालश्रम के साथ बच्चाें की शिकायत भी सुनती है। बरेली संयोजक गजेंद्र ने बताया कि बरेली में संस्था का कार्यालय खुल गया है, इसके बाद इस मामले में और सतर्क ता बरती जा रही है।