बरेली। शोहदों की लगातार बढ़ती हरकतों, पड़ोसियों के तानों और सुस्त पुलिसिंग की वजह से किशोरी की जान चली गई। पांच दिन से वह लगातार इस तरह के घटनाक्रम से गुजर रही थी जिसका उसने पहले कभी सामना नहीं किया था। शायद तभी वह परिवार को भी अपनी घुटन न बता सकी और कमरा बंद कर फंदे से लटक गई।
गांव के ही शोहदों की हरकत के बाद पीड़ित परिवार को तेजी से कार्रवाई की उम्मीद थी। पिता का आरोप था कि घटना के दिन तो चौकी प्रभारी ने थाने से भगा दिया था। हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि दरोगा ने बेरुखी से बात करके पेशबंदी में ऐसी शिकायतें करने की बात कही थीं और फिर तहरीर लिखकर लाने को कहा था। नियमानुसार किशोरी से बुलवाकर भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती थी पर ऐसा नहीं हुआ। तब पिता-पुत्री थाने से चले गए। उन्हें लगा कि पुलिस ऐसे कार्रवाई नहीं करेगी तो किसी जानकार से बात करके वूमेन हेल्पलाइन पर कॉल कर दी। वहां से मदद भी मिली और अगले दिन स्टाफ की मदद से रिपोर्ट लिखी भी गई। पिता के मुताबिक इस बार थाने के मुंशी ने मामला मारपीट में निपटाने की कोशिश करके तहरीर बदलने को कहा। जब वे लोग अड़े रहे तो शाम को रिपोर्ट लिखी।
पुलिस चाहती तो आरोपियों को पकड़ सकती थी पर किशोरी के कोर्ट में बयान के बाद गिरफ्तारी की बात कही गई। मेडिकल परीक्षण की अभी रिपोर्ट नहीं आ सकी थी और कोर्ट में बयान भी नहीं हुए थे। इस बीच तानों का दौर जारी रहा। आरोपी भी गांव में खुले घूम रहे थे जिससे किशोरी ने कार्रवाई की आस छोड़कर मौत का रास्ता चुन लिया।
बीडीसी सदस्य और रोजगार सेवक भी दबोचा
भमोरा। किशोरी के मरने के बाद हरकत में आई पुलिस ने जितनी तेज कार्रवाई की, वह अपने आप में रिकार्ड है। आमतौर पर पुलिस ऐसे मामले में पहले से दर्ज रिपोर्ट में धारा बढ़ा देती है पर यहां लीक से हटकर आत्महत्या के लिए उकसाने का नया मामला दर्ज किया गया। इसमें पहले आरोपियों के साथ ही नए दो आरोपियों के नाम शामिल किए गए जिन पर किशोरी को ताने देने का आरोप है। पुलिस ने इसके बाद एक बीडीसी सदस्य और रोजगार सेवक को भी पकड़ लिया। इनमें से एक को आरोपित माना जा रहा है तो दूसरे से संदेह के आधार पर पूछताछ की जा रही है। मंगलवार को आरोपियों के जेल जाने पर सही स्थिति साफ होगी। पुलिस ने गांव में कुछ घरों में दबिश दी है।