बरेली। गवाहों के मुकरने पर एससी-एसटी एक्ट के दो आरोपियों को तो अदालत ने बरी कर दिया, लेकिन विवेचना में त्रुटि के लिए तत्कालीन सीओ मुकुल द्विवेदी के खिलाफ जांच कराने के लिए डीजीपी को लिखा है। हालांकि मुकुल द्विवेदी की करीब दो साल पहले ही मथुरा के जवाहर बाग कांड के दौरान हत्या कर दी गई थी।
मुकदमे के वादी मुंशीलाल के मुताबिक चार जून 2014 की रात करीब पौने 12 बजे जीता , हितेश पाठक, गौरव गंगवार और विपिन चौधरी ने उसके घर आकर गालियां देते हुए उसके बेटे को जान से मारने की धमकी दी। उनके परिवार का राजकुमार दरवाजा खोलने आया तो उसे जान से मारने के लिए कई फायर किए लेकिन वह बाल-बाल बच गया। इन लोगों ने उसका दरवाजा भी तोड़ने की कोशिश की। कोर्ट में मुकदमे के गवाह गवाही से मुकर गए। अदालत ने अभियुक्त गौरव गंगवार और विपिन को आरोपों से बरी कर दिया लेकिन गवाह भानु प्रताप, राजकुमार और अशरफ हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा गवाहों ने अपने बयान में कहा कि विवेचना अधिकारी ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की। कोर्ट ने इस पर तत्कालीन विवेचना अधिकारी सीओ मुकुल द्विवेदी के खिलाफ विवेचना में त्रुटि के लिए जांच का आदेश दिया। डीजीपी और आईजी को जांच के बाद अवगत कराने को भी कहा है।