रविवार को सीओ दफ्तर आए पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पुलिस उनको थाने के एक कमरे में ले गई। वहां एक दरोगा ने कहा कि कुछ रुपये हम अभी दे देंगे और बाकी रुपया लुटेरों को पकड़ेंगे तो वापस करेंगे।
उन्होंने लूट की बजाय मारपीट की तहरीर ली और 20 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद किसानों को धमकाकर थाने से भेज दिया। गांव पहुंचकर परिवार को बताया तो लोगों ने आपत्ति जाहिर की। कहा, जिन्होंने लूट की है उन्हें उसी धारा में सजा मिलनी चाहिए। आशू का कहना था कि दो हजार रुपये के एक नोट को लेकर आढ़ती से उसकी तकरार हुई थी।
तब आढ़ती ने कहा था कि नोट न चले तो वापस कर जाना। यह नोट भी लूटी गई रकम में था और अब दरोगा ने जो रकम लौटाई है, उसमें भी यह नोट है। वह समझ नहीं पा रहे कि लूटी गई रकम पुलिस तक कैसे पहुंच गई। इसकी जांच होनी चाहिए।
सीओ ऑफिस के सामने खड़े होकर किसानों ने लूटी गई रकम में से 20 हजार देने और दो हजार के कथित नोट को लेकर जो बयान दिए उसका मीडिया कर्मियों ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। वहीं सीओ नागेंद्र यादव का कहना था कि उन्होंने तो कॉल करके पीड़ितों को लूट की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बुलाया पर कोई नहीं आया। लोग आएंगे तो रिपोर्ट करा देंगे।
एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने इस मामले में कहा कि किसानों को रुपये वापस करने और दो हजार के नोट की बात किसी तरह गले नहीं उतर रही। अगर पुलिस लुटेरों को पकड़ ही लेती तो खुद ही गुडवर्क लेकर दमदारी से खुलासा करती। किसान ऐसा क्यों कह रहे हैं, पता नहीं। हालांकि पुलिस तेजी से काम कर रही है और जल्द ही सही खुलासा कर दिया जाएगा।