कोहाड़ापीर चौकी में लगाई थी आग, मूर्ति तोड़ी थी
कोर्ट के आदेश में जिक्र है कि कोहाड़ापीर तिराहे के पास मंच बनाकर जब मौलाना तौकीर रजा ने उग्र भाषण दिया तो समुदाय विशेष के लोगों की भीड़ गुस्से से भर गई। भीड़ ने यहां मौजूद पुलिस-प्रशासन के लोगों से मारपीट शुरू कर दी। जुलूस में शामिल लोगों ने कोहाड़ापीर पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। चौकी के मंदिर की मूर्ति तोड़ दी थी। समुदाय विशेष के लोगों की दुकानों में तोड़फोड़ की गई थी। साथ लाए गैस सिलिंडरों व बोतलों में भरे पेट्रोल से दुकानों में आग लगा दी थी।
तत्कालीन अफसरों ने नहीं किया दायित्व का पालन
कोर्ट ने कहा कि जानबूझकर दंगा भड़काने वाले मौलाना तौकीर रजा खां का नाम विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद चार्जशीट में शामिल नहीं किया जाना इसका उदाहरण है। लगता है कि तत्कालीन पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया और मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा खां का जानबूझकर सहयोग किया गया। सारे तथ्यों व विवेचना को मद्देनजर रखते हुए निष्कर्ष निकलता है कि मौलाना तौकीर रजा खां के इशारे पर ही दंगे व लूटपाट की गई। न्याय हित में मौलाना तौकीर रजा खां को विचारण के लिए तलब किए जाने का पर्याप्त आधार पाया जाता है।
कोर्ट ने दिया प्लूटो और योगी का उदाहरण
कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि मौलाना तौकीर दरगाह आला हजरत परिवार से जुड़े हैं। मौलाना धर्मगुरु की हैसियत रखते हैं और एक पार्टी के अध्यक्ष हैं तो मुस्लिम समाज पर उनका काफी प्रभाव है। कोई धार्मिक व्यक्ति सत्ता की सीट पर बैठता है तो उसके अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। दार्शनिक प्लूटो ने कहा है कि हमारे नगरों में तब तक कष्टों का अंत नहीं होगा जब तक कोई दार्शनिक राजा न हो।
सत्ता का प्रमुख किसी धार्मिक व्यक्ति को होना चाहिए, क्योंकि उसका जीवन भोग का नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का होता है। वर्तमान में योगी आदित्यनाथ हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इस अवधारणा को सत्य साबित किया है। अगर किसी धार्मिक व्यक्ति द्वारा विपरीत काम किया जाता है, जैसे अपने समुदाय को भड़काना आदि तो कानून-व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाती है और दंगे होते हैं, जिसका उदाहरण तौकीर रजा खां हैं।
तौकीर ने कहा था, खून की नदियां बहा दूंगा
कोर्ट ने कहा कि केस डायरी में इस बात का उल्लेख है कि तौकीर रजा खां अपनी पार्टी के लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। इनकी ओर से पुलिस प्रशासन व दूसरे समुदाय को यह कहकर ललकारा गया कि अभी आधे घंटे में चाहबाई से जुलूस को जाने न दिया गया तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। समुदाय विशेष के लोगों के खून की नदियां बहा दूंगा। उनके घर व दुकान को तहस-नहस कर आग के हवाले कर दूंगा। केस डायरी से यह भी पता चलता है कि तौकीर रजा खां को विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया।
गवाह रामनिवास शर्मा के बयान में आया है कि तौकीर रजा अपनी गाड़ी से कोहाड़ापीर आए। वहां अफवाह फैल गई कि तौकीर रजा ने दंगा फैलाया है। कोर्ट ने कहा कि इस बयान से स्पष्ट है कि मौलाना तौकीर रजा की तकरीर के बाद शहर में दंगा फैल गया। गवाह ताहिर हुसैन के बयान से भी यह साफ है कि मौलाना तौकीर रजा की तकरीर से ही दंगे हुए थे, उसके मास्टरमाइंड आईएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां थे।
न्यायाधीश बोले- परिवार में भय व्याप्त है
अपने दस पन्नों के आदेश में न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। कहा कि उनके द्वारा साल 2022 में चर्चित ज्ञानव्यापी प्रकरण का निस्तारण वाराणसी में किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि, मुझे लगभग 32 पन्नों का धमकी भरा पत्र मुस्लिम संगठन की ओर से मिला जिसकी एफआईआर कराई गई। अभी तक किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी न होने से मेरी माता व भाई को मेरी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है और मुझे उनकी। मेरे बच्चे भी मुझसे पूछते हैं कि पापा न्यूज चैनल में दिखाया जा रहा है कि आपको जान से मार दिया जाएगा।
उनको समझाने के लिए मैं कह देता हूं कि बेटा यह सब झूठ दिखाया जा रहा है। समाज में भय व्याप्त है। कुछ समय पहले ही मौलाना तौकीर रजा खां ने बरेली शहर में फिर से दंगे भड़काने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध अपमानजनक बातें भी मौलाना तौकीर रजा खां द्वारा कही गईं। इस पर मेरी पत्नी ने कहा कि जब यह व्यक्ति देश के प्रधानमंत्री के बारे में अपमानजनक बातें कह सकता है तो वह कुछ भी कर सकता है।