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मौसम की बिगड़ी चाल, सर्द हवा से कांप गए लोग 

Sat, 28 Jan 2017 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Corruptly weather, people were shivering from the chill wind - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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मौसम विभाग की सटीक संभावना सच साबित हुई। 26 जनवरी को दिन भर गुनगुनी धूप ने लोगाें की छुट्टी तो दोगुनी कर दी। ऐसा लग रहा था कि बारिश नहीं होगी। लेकिन देर शाम छाए बादल ऐसे गरज कर बरसें कि सुबह तक रिमझिम बारिश होती रही। बरेली में 15 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। हालांकि बारिश तेज नहीं थी और हवा नहीं चली तो किसानों के चेहरे खिले रहे। गेहूं के लिए यह बारिश सोना साबित होगी। दाल व अन्य फसलों को भी अब सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि शहर कीचड़- कीचड़ हो गया। गलियाें में पानी भरा और गंदगी का अंबार लगा था। कूड़ा घरों की हालत बरसात से और बदतर हो गई। 
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शुक्रवार को सुबह नौ बजे तक हल्की धूप निकली इसके बाद बादल छा गए। सर्द हवा चलती रही। दोपहर में लोग धूप के लिए तरस गए। हालांकि तापमान में मामूली अंतर दिखा। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है यह सामान्य से 3 डिग्री अधिक है। शाम होते ही मौसम और सर्द हो गया। मौसम विभाग ने न्यूनतम तापमान 11.3 दर्ज किया है। मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद तीन दिन हल्की ठंड रहेगी, सुबह और शाम को कोहरा छा सकता है। तापमान भी गिरेगा। एक फरवरी से मौसम साफ होगा।

कुतुबखाना रोड पर भर गया पानी, गलियाें में गंदगी 
रात से सुबह तक रूक- रूककर हुई रिमझिम बारिश से गलियाें में गंदगी फैल गई। मुख्य सड़कों और बाजारों में पानी भरा रहा। कीचड़ की वजह से भी लोग परेशान हुए। मलूकपुर, जसौली में पानी भरने से लोगाें को चलने में दिक्कत हुई। एजाज नगर गौटियां की गलियों में भी पानी भरने की शिकायत मिली। कुतुबखाना से लल्ला मार्केट रोड पर सड़काें पर गड्ढे होने से पानी भर गया। वाहन निकलते समय जाम की स्थिति बनी। कुछ लोग फिसल कर गिर भी गए। इंदिरा मार्केट, नगर निगम और कलेक्ट्रेट के पास कूड़ा घरों में दुर्गंध से लोग परेशान रहे। कू ड़े की वजह से कीचड़ सड़क पर आ गया। गुलाबनगर, कटरा चांद खां, सैलानी, हजियापुर, नवादाशेखान, किला में कीचड़ और गंदगी रही। 
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बारिश से नहीं लगेगा फसल में रोग, सिंचाई का खर्चा बचा
बहेड़ी/नवाबगंज। झमाझम बारिश से गेहूं, सरसों और लाही की फसल को फायदा हुआ है। इस समय अगेती और पिछैती दोनों किस्म की गेहूं की फसल में सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। किसान इसलिए खुश हैं कि सिंचाई के लिए डीजल का खर्च बच जाएगा। गेहूं में लगने वाली सूढ़ी का खतरा भी टल गया है। सरसों और लाही में लगा माहू रोग भी इससे खत्म हो जाएगा। इन दिनों सब्जियों की फसल को तमाम बीमारियों ने अपनी चपेट में ले लिया है लेकिन बारिश से बीमारियों से निजात मिलेगी। हालांकि तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गन्ने की फसल गिर गई है। मटर का बाजार तो पहले से ही ठप पड़ा हुआ है। मटर के पौध की नीचे की फली सड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। रिठौरा के किसान मेघनाथ, प्रवीन, इतवारी, बाबू सिंह आदि ने बताया कि मिर्च, गेहूं और बरसीम आदि की फसलों को काफी लाभ हुआ है।  

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया सिंचाई न करें किसान 
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के कृषि वैज्ञानिकाें ने सलाह दी है कि बारिश के बाद किसान गेहूं की किसी भी अवस्था की फसल में सिंचाई न करें। नवंबर माह के दूसरे पखवाड़े में बोई गेहूं की फसल जोकि 65 से 70 दिनाें की हो गई है व बालियां निकलने की पूर्व अवस्था में हैं तो उसमें बारिश बंद होने के बाद किसान गेहूं की फसल में शेष बची 25 से 30 किग्रा यूरिया का प्रति एकड़ की दर से दोपहर में बुरकाव करें। लेकिन ध्यान रहे कि पत्तियां ओस में न भीगी हो। खरपतवार निकाल दें। इस सप्ताह कोई कीट लगने की संभावना भी नहीं है। गन्ने की फसल की कटाई इस सप्ताह न करें। चना, मटर, राजमा व मसूर के लिए बारिश अच्छी है।
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