बरेली कॉलेज में भ्रष्टाचार के मामले में कमिश्नर ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर किए हैं, लेकिन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (आरएचईओ) इस दुविधा में हैं कि कार्रवाई प्राचार्य पर की जाए या प्रबंधन पर। इसको लेकर अब लीगल एडवाइज ली जाए।
इस संबंध में सोमवार या मंगलवार को जांच समिति के सदस्यों की बैठक भी बुलाई गई है। वहीं प्रबंधन कार्रवाई से बचने के लिए रास्ते खोज रहा है।
छात्रों और कर्मचारियों की शिकायत पर कमिश्नर ने बरेली कॉलेज में पिछले पांच साल के रिकॉर्ड की जांच कराई थी। इसमें करोड़ों रुपये के ठेके बिना टेंडर देने, वित्तीय अनियमितताओं के अलावा फीस के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली थी। ऑडिट की आपत्तियां भी देखी गई थीं। उसमें भी गोलमाल सामने आया था।
एक माह से ज्यादा चली जांच के आधार पर कमिश्नर ने कार्रवाई करने का पत्र आरएचईओ को जारी किया। हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई प्राचार्य पर होगी या प्रबंधन पर। इसको लेकर अब लीगल एडवाइज ली जाए। सोमवार को जांच समिति के सदस्यों की बैठक प्रस्तावित है। हालांकि आरएचईओ का कहना है कि वह लखनऊ में हैं।
अगर सोमवार को बैठक नहीं हो सकी तो मंगलवार को बैठक कर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया जाएगा। वहीं सूत्रों की मानें तो प्रबंधन के पदाधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव है, लेकिन कई लोग इसमें समझौता कराने में जुटे हैं। वहीं बोर्ड ऑफ कंट्रोल में प्रबंध समिति के चुनाव का भी दबाव है। ऐसे में किसी पदाधिकारी पर कार्रवाई होना मैनेजमेंट के चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
लीगल एडवाइज ली जाएगी। उसके बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। सोमवार या मंगलवार को जांच समिति के साथ बैठक करेंगे। लीगल एडवाइज लेकर ही एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए जाएंगे। अभी ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
- डॉ. राजेश प्रकाश, आरएचईओ