बरेली। देशभर में एक बार फिर कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए शासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम के लिए फ्लू कॉर्नर सक्रिय कर दिए हैं। संदिग्ध लोगों की एंटीजन जांच हो रही है, लेकिन लोग अभी भी संभावित खतरे से बेपरवाह हैं। सार्वजनिक स्थानों पर बगैर मास्क के आवाजाही जारी है। अस्पताल और सरकारी विभाग में सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है। जो संक्रमण के केस और बढ़ा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिले में फिलहाल पांच केस सक्रिय हैं। संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक कोरोना के मामले उत्तर प्रदेश में फिर बढ़ रहे हैं। अब तक जो केस आए हैं उनमें तीसरी लहर के जिम्मेदार वैरिएंट ओमिक्रॉन के लक्षण मिल रहे हैं। हालांकि, संक्रमित केस की जीनोम सीक्वेंसिंग से सटीक जानकारी मिल सकती है। कहा कि अभी पांच केस हैं। करीब पखवाड़ा भर बाद अगर सावधानी नहीं बरती गई तो केस बढ़ने की आशंका है। उन्होंने लोगों से एहतियात बरतने, वैक्सीनेशन करवाने, संदिग्ध लोगों से कोविड जांच कराने और उन्हें सार्वजनिक स्थान पर आवाजाही से बचने का सुझाव दिया है।
सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि सरकार के निर्देशानुसार संचारी रोग समेत कोविड नियंत्रण के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। अगर किसी को संदिग्ध लक्षण है तो वह स्थानीय सीएचसी या तीन सौ बेड अस्पताल में बने फ्लू कॉर्नर पर संपर्क कर सकते हैं। स्क्रीनिंग के बाद उनकी कोविड जांच की जा सकती है।
आरटीपीसीआर जांच की मशीन खराब
जिले में एंटीजन जांच की जा रही है मगर आरटीपीसीआर जांच के लिए जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब में लगे उपकरण में तकनीकी खामी की वजह से जांच प्रभावित है। हालांकि, संदिग्ध लक्षण मिलने पर संबंधित सैंपल की जांच लखनऊ केजीएमयू से कराने का दावा अफसर कर रहे हैं। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 20 दिन पहले जहां रोजाना 80 से सौ जांच हो रही थी, वह अब ढाई से तीन सौ तक जा पहुंची हैं।
20 लाख लोगों को नहीं लगी है बूस्टर डोज
जिला प्रतिरक्षण कार्यालय के अनुसार जिले में अभी करीब 20 लाख लोग बूस्टर डोज से वंचित हैं। मगर 31 जनवरी के बाद शासन से वैक्सीन की आपूर्ति न होने की वजह से कोविड वैक्सीनेशन ठप है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक जिन लोगों को बूस्टर डोज नहीं लगी है उनके संक्रमित होने पर लक्षण गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल, निजी अस्पताल से पेड वैक्सीनेशन का विकल्प है।