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कोरोना वायरस: एंटीबायोटिक से लेकर कई दवाएं 60 फीसदी तक महंगी

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WHO Advisory about Corona Virus - फोटो : Amar Ujala
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चीन से कच्चे माल की आपूर्ति घटना बताई जा रही जेनेरिक दवाओं के दाम बढ़ने की वजह
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हालात न सुधरे और बढ़ सकते हैं दाम, कुछ दवाएं बाजार में टोटा भी हुआ

बरेली। चीन में फैले कोरोना वायरस का असर अब जेनेरिक दवा बाजार पर भी दिखने लगा है। जेनेरिक दवाओं के दाम 50 से 60 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि दवाओं के लिए अधिकांश कच्चा माल चीन से आता है, जो नहीं आ पा रहा है, जिन दवाओं के दामों में इजाफा हुआ है उनमें अधिकतर एंटीबायोटिक और पेनकिलर (दर्द निवारक) हैं। अमर उजाला ने पांच फरवरी के अंक में इसकी आशंका पहले ही जता दी थी कि अगर अगले पंद्रह दिनों में हालात नहीं सुधरे तो दवाओं के दाम में और बढ़ोतरी होगी।
बरेली के थोक दवा कारोबारियों के अनुसार, देश में 500 से अधिक जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियां हैं। सभी कंपनियां अधिकतर एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) यानी साल्ट चीन से ही आयात करती हैं। चीन में फैले कोरोना वायरस की वजह से करीब एक माह से भारत में जेनेरिक दवाओं के लिए साल्ट की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नतीजतन जेनेरिक दवा निर्माता कंपनियां दवाइयों के दाम बढ़ा रही हैं। बाजार में कुछ दवाओं का टोटा भी होने लगा है। इसका असर ये हुआ कि कई जेनेरिक दवाएं मरीजों को नहीं मिल पा रहीं। दवा व्यापारी राजेश ओबराय ने बताया कि आपूर्ति न होने से दवाओं की कीमत बढ़ी है। हालात यही रहे तो अभी कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है।

इनके बढ़े दाम

पैरासिटामॉल, सेफीक्सीम, एमोक्सिलिन, डायक्लोफे नेक सोडियम, सिप्रोफ्लोक्सासिन, डेक्सामेथासोन, थर्माडॉल, पेंटा पाउडर, जेंटामाइसिन, क्लेव स्ल्वायड, टिनिडाजोल और निडाजोल समेत अन्य दवाओं के दाम में 40 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
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भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
भारत बड़े पैमाने पर कच्चे माल के लिए चीन के आयात पर निर्भर है, इसलिए यहां के कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और यहां दुनिया की 12 फीसदी दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग की जाती है। भारत से दवाओं का निर्यात अमेरिका जैसे देशों तक होता है। अंतरराष्ट्रीय मद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि कोरोना वायरस से फैली महामारी की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हो जाएगी। आईएमएफ ने कहा कि इससे ग्लोबल जीडीपी की ग्रोथ रेट में 0.1 से 0.2 फीसदी तक की कमी आ सकती है।

सिर्फ दहशत ने बढ़ा दिए मास्क के दाम

बरेली। कोरोना वायरस ने हर जगह दहशत फैला रखी है। नतीजतन बीते बीस दिनों से बाजार से एन-95 मास्क पूरी तरह से गायब हो चुका है। कंपनियां इसकी पूर्ति नहीं कर पा रही हैं। वहीं, डिस्पोस्बिल मास्क की मांग दस गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इसका इस्तेमाल अधिकतर डॉक्टर ही करते हैं। अब तक बाजार में इसकी कीमत तीन रुपये थी, जो बढ़कर 15 से 20 रुपये तक हो गई है। दवा व्यापारियों का कहना है कि लोगों को धैर्य से काम लेना चाहिए। किसी तरह की अफवाहों में पड़कर मास्क की खरीददारी न करें।
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