कोरोना महामारी की संभावित चौथी लहर से बचाव के लिए किशोरों के टीकाकरण की गति ने फिर तेजी पकड़ ली है। करीब एक माह में ही 51 हजार से ज्यादा किशोरों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। अधिकारियों ने सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड की परीक्षाएं खत्म होने के बाद करीब 80 हजार किशोरों के और प्रतिरक्षित होने की उम्मीद जताई है। हालांकि बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार सुस्त है।
दिल्ली, हरियाणा में बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों में बड़ी तादाद किशोरों की है। इसे देखते हुए बरेली में भी दूसरी डोज लगवाने के लिए अभिभावक बच्चों को लेकर टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचने लगे हैं। माह भर के रिकॉर्ड पर गौर करें तो 27 हजार किशोरों को वैक्सीन की पहली और 51 हजार से ज्यादा किशोरों को दोनों डोज लग चुकी है। पहली डोज लगाने का लक्ष्य करीब माह भर पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने हासिल कर लिया है। वहीं, 12 से 14 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों का लक्ष्य करीब सवा लाख था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। इनमें दूसरी डोज लगवाने वालों की तादाद भी अभी कम है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 12 से 14 वर्ष आयुवर्ग के अब 117786 बच्चों को पहली, 1151 बच्चों को दूसरी डोज लग चुकी है। प्रभारी डीआईओ डॉ. केसी जोशी के मुताबिक वैक्सीन की पहली डोज 16 मार्च से लगनी शुरू हुई थी। शुरुआत में बच्चों की परीक्षाएं चल रही थीं, लिहाजा टीकाकरण की गति कम रही। अप्रैल से पहली डोज की गति बढ़ी। नियमानुसार 28 दिन बाद ही दूसरी डोज लगेगी।
पांच साल से अधिक आयुवर्ग के बच्चों के टीकाकरण के लिए गाइडलाइन का इंतजार
सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने दूसरी डोज लगवाने से वंचित किशोरों से केंद्रों पर जाकर वैक्सीन लगवाकर सुरक्षित होने की अपील की है। बताया, विश्व टीकाकरण सप्ताह के जरिए टीकाकरण की गति बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। वंचित किशोरों को ट्रैक कर वैक्सीन लगाई जा रही है। जिन बच्चों की परीक्षाएं चल रहीं हैं, उनके अभिभावक परीक्षा समाप्त होने के बाद वैक्सीन लगवाने को बात कह रहे हैं। पांच साल से अधिक आयुवर्ग के बच्चों को वैक्सीन लगाए जाने के लिए शासन की ओर से गाइडलाइन का इंतजार है।