पार्षद और डॉक्टर को बुलाकर दिखाई हकीकत, महीनों से ठप पड़ा था टीकाकरण
बरेली। गोलमाल की लहर अगर पूरे महकमे में ही चल रही हो तो इंतिहा किस हद तक पहुंचेगी, इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग में कोरोना जैसी महामारी के दौरान किस कदर गोलमाल किए गए, अब एक एएनएम ने भी इसकी बानगी पेश की है। शहर में अफसरों की नाक के नीचे नगरिया परीक्षित में उपस्वास्थ्य केंद्र की सरकारी इमारत उसने एक परिवार को रहने के लिए किराये पर उठा दी और टीकाकरण जैसी सारी जिम्मेदारियों को छोड़कर गायब हो गई। इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की तमाम शिकायतों के बाद अफसरों ने जब अस्पताल में दूसरी एएनएम की तैनाती की तो यह राज खुला।
नगरिया परीक्षित उप स्वास्थ्य केंद्र पर यूं तो कई महीनों से बच्चों के टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच जैसे कामों के लिए लोग परेशान हो रहे थे लेकिन लॉकडाउन होने के बाद तो हद ही हो गई। अस्पताल के चक्कर काटने वाले लोगों के मुताबिक पूरे लॉकडाउन भर यहां तैनात एएनएम एक भी दिन उन्हें नजर नहीं आई। बताया जाता है कि इलाके के लोगों की तरफ से लगातार शिकायतें मिलने के बाद अधिकारियों ने उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम से स्पष्टीकरण मांगा लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अफसरों ने इस एएनएम का तबादला करके उप स्वास्थ्य केंद्र में दूसरी एएनएम अंजलि को तैनात कर दिया।
एएनएम अंजलि के मुताबिक वह पहले ही दिन ड्यूटी पर उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं तो वहां मेन गेट पर ताला लटका मिला। उन्होंने गेट से ही कई बार पुरानी एएनएम को फोन किया लेकिन फिर भी वह उन्हें चाबी देने नहीं पहुंची। परेशान होकर उन्होंने इलाके के पार्षद महेश राजपूत से संपर्क कर उन्हें मौके पर आने को कहा। महेश राजपूत की मदद से दूसरी चाबी का इंतजाम किया गया और फिर गेट खोलकर जब अंजलि ने महेश के साथ अंदर कदम रखा तो यह देखकर दंग रह गए कि उप स्वास्थ्य केंद्र के कमरों में एक परिवार रह रहा था। इसके बाद पार्षद ने हेल्थ सुपरवाइजर सुधा सक्सेना और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डॉ. विजेंद्र सिंह को इसकी जानकारी दी तो वे भी हैरान रह गए।
उपस्वास्थ्य केंद्र में रह रहे गिरधारीपुर गांव के परिवार ने बताया कि पुरानी एएनएम यहां चार्ज लेने लिया था तभी उन्हें उपस्वास्थ्य केंद्र की इमारत रहने के लिए किराये पर दे दी थी। किरायेदार महिला ने बताया कि अब उनसे भी एएनएम किराया लेने के लिए ही संपर्क करती है। पार्षद महेश राजपूत ने बताया कि जब उन्होंने एएनएम को फोन करके इस बारे में पूछा तो उसने उनसे बदसलूकी की। उन्होंने बताया कि अस्पताल में रह रहे परिवार ने आसपास काफी गंदगी कर रखी है। उसे इमारत को खाली करने को कह दिया है। डॉक्टर को भी बुलाकर स्थिति दिखा दी है। अब वे उच्चाधिकारियों से भी शिकायत करेंगे।
कोरोना के दौर में गड़बड़ियों की कमी नहीं
कुछ ही समय पहले एक बड़ी गड़बड़ी खुद जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पकड़ी थी। उन्होंने कोविड- 19 अस्पतालों और क्वारंटीन सेंटरों में भर्ती लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंस की तो पता चला कि उन्हें दिए जा रहे खाने में गोलमाल किया जा रहा है। इसके बाद सीएमओ को कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए लेकिन कार्रवाई नाम की ही हुई। इसके अलावा क्वारंटीन और आइसोलेशन सेंटर में भर्ती मरीजों के लिए टेम्पररी बेड और चादर खरीद का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सीएमओ ने बेहतर क्वालिटी की चादर खरीदने के निर्देश देने की बात कही है। वहीं, खाने की व्यवस्था में भी सुधार हुआ है।
संबंधित प्रकरण की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा मामला है तो यह काफी गंभीर लापरवाही है। इस मामले पर सोमवार को संबंधित ब्लॉक प्रभारी से जांच कराई जाएगी और जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी वह की जाएगी। डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ