बरेली। नगर निगम में एक और बड़ा खेल उजागर हुआ है। अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर करके कई ठेकेदारों ने करोड़ों की एफडी निकाल ली हैं। इसका खुलासा शिकायत के बाद हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए मेयर डॉ. उमेश गौतम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से इसकी जांच कराने को कहा है। चार साल में जितने भी कार्य ठेकेदारों को दिए गए हैं, उन सभी को जांच के दायरे में लाया जाए। मेयर ने मुख्य अभियंता से सभी कार्यों की फाइलें तलब की हैं।
उपसभापति महेश राजपूत, पार्षद कपिल कांत ने मेयर डॉ. उमेश गौतम से शिकायत की कि उनके वार्डों में जिन ठेकेदारों ने सड़कें बनाई थीं, वे तय समय से पहले ही उखड़ रही हैं। ठेकेदारों को बुलाकर दोबारा कार्य कराया जाए। शिकायत के बाद वार्ड नंबर 51 में सड़कें बनाने वाले ठेकेदारों की फाइलें तलाशी गईं तो उनमें से कुछ की एफडी गायब मिलीं। इसके बाद संदेह हुआ है कि यह बड़ा खेल चल रहा है। अंदेशा है कि 80 फीसदी एफडी फाइलों से निकल चुकी हैं, जबकि पांच साल तक इन्हें नहीं निकाला जा सकता है। खेल उजागर होने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। यह भी साफ हो गया है कि ठेकेदारों ने यह काम इंजीनियरों, लिपिकों आदि की मदद के बिना नहीं किया है।
इन शिकायतों से भी खुला खेल
कुछ पार्षदों ने मेयर से शिकायत की कि टेंडर लेने के बाद कई ठेकेदारों ने काम शुरू नहीं किए। वार्ड 78 सूफी टोला के पार्षद मोहम्मद अंजुम शमीम ने कहा कि वर्ष 2021 में उनके वार्ड में घेर जाफर खां से लेकर ईशा पब्लिक स्कूल, पैराडाइज शादी हाल से मुन्ना खां के नीम की मठिया तक एक ठेकेदार से सड़क के दोनों ओर नाली निर्माण, सड़क का निर्माण करवाया जाना था लेकिन यह कार्य अधूरा ही है। कूर्मांचल नगर से बड़ी बिहार और सौफुटा रोड तक नाला निर्माण पास हुआ। इसका टेंडर एक ठेकेदार को दिया गया। एक साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। कुछ अन्य ठेकेदारों ने भी काम शुरू नहीं किए और कुछ ने काम बीच में ही छोड़ दिए। इन सभी पर आरोप लगे हैं कि फाइलों से इनकी एफडी गायब हैं।
वर्ष 2018 से लेकर आज तक के कार्यों की होगी जांच
शिकायत के बाद प्रथम दृष्टया माना गया है कि 80 फीसदी ठेकेदारों ने अपनी एफडी फाइलों से निकाल लीं। इससे नगर निगम को भी करोड़ों का चूना लगा है। इसी को देखते हुए वर्ष 2018 से लेकर आज तक जितने भी ठेकेदारों को कार्य दिए गए हैं उनकी फाइलों की जांच होगी। यह जांच नगर निगम की टीम से न कराकर पीडब्ल्यूडी से कराने की सिफारिश की गई है, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
कई लोगों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
हाल ही में नगर निगम में मामला सामने आया था कि कुछ ठेकेदारों ने एफडी की कलर फोटो कराकर दूसरे टेंडरों की फाइलों में लगा दी। इस प्रकरण की जांच पूरी भी नहीं हुई थी कि अब दूसरा बड़ा खेल सामने आ गया है। बताते हैं कि नगर निगम के कई जेई और लिपिकों की मिलीभगत से यह खेल हुआ है। कुछ लोगों के नाम तो पार्षदों ने भी लिए हैं। हालांकि जांच में ही दोषियों के नाम सार्वजनिक होंगे।
लागत रकम की 10 फीसदी की देनी होती है एफडी
जब कोई ठेकदार किसी कार्य का टेंडर लेता है तो उस कार्य की लागत की दस फीसदी रकम की एफडी बनवानी पड़ती है। यह राशि संबंधित बैंक में जमा होती है। चेक के रूप में बनी एफडी नगर निगम की फाइलों में रहती है। यदि पांच साल तक किए गए कार्य की गुणवत्ता सही रहती है तो एफडी ठेकेदार को लौटा दी जाती है। यदि गुणवत्ता खराब होती है और ठेकेदार कार्य करने से मना करते हैं तो निगम उनकी एफडी की राशि जब्त कर लेता है। यह एक तरह से जमानत राशि है।
मेरे इलाके की सड़कों की गुणवत्ता खराब हुई तो मैंने मेयर से शिकायत की। सड़क बनाने वाले ठेकेदार की फाइल तलाश कराई गई तो उसमें एफडी गायब मिली। इसमें पूरा खेल हुआ है। मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग रखी गई है। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। - महेश राजपूत, उपसभापति नगर निगम
शिकायत के बाद प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया है कि नगर निगम के कई ठेकेदारों ने एफडी निकाल ली हैं। यह गंभीर बात है। नगर आयुक्त को पत्र लिखा है। हमने कहा है कि पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से इसकी जांच कराएं। साथ ही मुख्य अभियंता से सभी फाइलें तलब की हैं। इसके लिए दो दिन का समय दिया गया है। - डॉ. उमेश गौतम, मेयर