बरेली। परमपावन पोप फ्रांसिस के निधन पर ईसाई समाज में शोक की लहर है। इस दुख के वातावरण में शोक सभाओं का आयोजन किया गया। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की गईं। श्रद्धांजलि देने के लिए मंगलवार को ईसाई समाज के बरेली धर्मप्रांत के अंतर्गत सभी संस्थानों को बंद रखने की घोषणा की गई है।
कैथोलिक डायोसिस में शोकसभा को संबोधित करते हुए बरेली धर्मप्रांत के अध्यक्ष फादर बिशप डॉ. इग्नेशियस डी सूजा ने पोप बनने तक के सफर का उल्लेख किया। युद्धग्रस्त क्षेत्रों, शरणार्थी शिविरों और समाज के हाशिए पर रह रहे समुदायों में उनकी उपस्थिति ने शांति, न्याय और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की पुकार को प्रकट किया। वे वैश्विक मंच पर एक नैतिक स्वर बनकर उभरे।
जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, धर्मों के बीच सौहार्द व शरणार्थियों और प्रवासियों के अधिकारों पर उन्होंने जोरदार आवाज उठाई। वो ऐसे पोप थे जिनका हृदय गरीबों और उपेक्षितों के लिए धड़कता था।
बरेली के फादर रॉयल एंथनी ने कहा कि पोप का जीवन मसीह के प्रेम की सजीव गवाही था। पोप फ्रांसिस की शिक्षाओं में दया को न्याय से ऊपर, मेल-मुलाकात को बहिष्कार से ऊपर और सेवा को सत्ता से ऊपर रखा गया। पोप की प्रेरणादायक पुस्तकों ने कलीसिया को गरीबों व पृथ्वी की अधिक चिंता करने और भाईचारे व शांति की संस्कृति को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।