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Bareilly News: एनओसी के बिना कनेक्शन ले रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सो रहा विद्युत सुरक्षा निदेशालय

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बरेली। लखनऊ में हुए हादसे के बाद जहां अन्य विभाग व्यावसायिक भवनों में खामियों की पड़ताल में जुटे हैं, वहीं विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अफसर चैन की नींद सो रहे हैं। यह विभाग न तो व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की नियमित जांच कर रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई। जिले में हर साल करीब 10 हजार नए व्यावसायिक कनेक्शन लिए जा रहे हैं। इसमें से महज 600 ही विद्युत सुरक्षा एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) के लिए आवेदन कर रहे हैं।
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इन प्रतिष्ठानों के स्वामी न केवल सुरक्षा को लेकर लापरवाह हैं, बल्कि तीन साल के वार्षिक शुल्क का भुगतान करने से भी कतराते हैं। निदेशालय के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि छोटे कनेक्शन धारक अनुमति नहीं लेते। इनके पोर्टल पर सालभर में 600 व्यावसायिक भवनों के आवेदन आते हैं। जांच और कार्रवाई तो दूर की बात, विभाग के पास यह भी आंकड़ा नहीं है कि जिले में कितने व्यावसायिक भवनों ने एनओसी ले रखी है।
विभाग का दावा है कि जिले के 97 फीसदी प्रतिष्ठान विद्युत सुरक्षा विभाग से अनुमति नहीं लेते। कोचिंग सेंटर, होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट में अक्सर शॉर्ट सर्किट या खराब विद्युत उपकरणों की वजह से अग्निकांड होते हैं। इसके बावजूद विभाग न तो कभी निरीक्षण करता है, न ही किसी प्रतिष्ठान को नोटिस दिया जाता है। यह हाल तब है, जबकि इसमें एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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10 किलोवाट तक 500 रुपये, 11 से 20 किलोवाट तक 675 रुपये, 21 से 50 किलोवाट तक 1350 रुपये, 51 से 100 किलोवाट तक दो हजार रुपये, 101 से 500 किलोवाट तक दो हजार रुपये और 100 किलोवॉट से अधिक प्रत्येक 20 किलोवाट पर 400 रुपये अतिरिक्त निरीक्षण शुल्क देना होता है। एक हजार किलोवाट से अधिक के कनेक्शन पर 22500 रुपये का भुगतान करना होता है। इसी को बचाने के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के स्वामी निदेशालय की अनुमति नहीं लेते।
...तो फिर कैसे हो रहे कनेक्शन
विद्युत सुरक्षा विभाग से एनओसी ली नहीं जा रही है, जबकि व्यावसायिक कनेक्शन लेने के लिए यह अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हर साल 10 हजार व्यावसायिक कनेक्शन किस आधार पर दिए जा रहे हैं? इसको लेकर विद्युत सुरक्षा निदेशालय और विद्युत निगम के अलग-अलग दावे हैं। अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं एनओसी के नाम पर फर्जीवाड़ा तो नहीं किया जा रहा है?
छोटे भवन वाले अनुमति के लिए आवेदन नहीं करते। सालभर में एनओसी के लिए करीब 600 आवेदन प्राप्त होते हैं। जल्द टीम बनाकर भवनों की जांच कराई जाएगी। निदेशालय में मानव संसाधन का अभाव है। अन्य विभागों से मदद ली जाएगी। - निर्भय सिंह, सहायक निदेशक, विद्युत सुरक्षा विभाग
विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी के बाद ही व्यावसायिक कनेक्शन जारी किए जाते हैं। इसका शुल्क जमा किया जाता है। अगर विद्युत सुरक्षा विभाग ऐसा कह रहा है कि सभी व्यावसायिक कनेक्शनों की एनओसी नहीं ली जाती है तो वह पूरी तरह से गलत है। - ज्ञान प्रकाश, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम
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