बरेली। शहर की महिलाओं ने खिलाड़ी के साथ ही कोच के रूप में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्षों पहले जिन खेलों में गिनी-चुनी महिलाओं की भागीदारी होती थी, आज वहां पूरी टीम है। इसके पीछे कोच की मेहनत है। ये वही महिलाएं हैं, जिन्होंने पहले खुद खेल के मैदान में पसीना बहाया और सफलता पाई। अब वे खिलाड़ियों की नई पौध तैयार कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में शहर की बेटियां पदक भी जीत रहीं हैं।
खिलाड़ी से कोच बनीं मीना, अब सिखा रहीं सेपकटाकरा
साई स्टेडियम में सेपकटाकरा का प्रशिक्षण दे रहीं मीना कुमारी ने एथलेटिक्स से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। कोच बीए शर्मा ने उनकी लगन को देखकर उन्हें सेपकटाकरा के खेल को आजमाने की सलाह दी। मीना ने इस सुझाव को अपनाया और वर्ष 2017 में श्रीलंका में हुई साउथ एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। अब कोच बनीं तो उनके मार्गदर्शन में पटना में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स के बालक वर्ग में उत्तर प्रदेश की टीम ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। वहीं 19 से 24 मई तक दमन एंड दीव में आयोजित हुए खेलो इंडिया बीच गेम्स में यूपी महिला सेपकटाकरा टीम ने तीन कांस्य पदक हासिल किया है।
पिता से सीखी हॉकी, अब दूसरों को बांट रहीं हुनर
स्पोर्ट्स स्टेडियम में हॉकी की कोच शिल्पा को यह हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता और भाई दोनों हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। शिल्पा ने भी बचपन में खिलौनों की जगह हॉकी स्टिक थाम ली थी। पिता से प्रशिक्षण लेकर वह चार बार हॉकी इंडिया सीनियर नेशनल में प्रतिभाग कर चुकी हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने कोच बनने का निर्णय लिया। उनके प्रशिक्षण में खिलाड़ी शिल्पी वर्ष 2024 में कर्नाटक में हुए स्कूल नेशनल्स में प्रतिभाग कर चुकी हैं।
खुद खिलाड़ी होने के साथ भारोत्तोलन कोच भी हैं अनीता
शहर के एक जिम में भारोत्तोलन का प्रशिक्षण दे रहीं अनीता ने वर्ष 2023 में दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। कोच के रूप में दूसरी पारी शुरू की तो उनके मार्गदर्शन में इरा अली और शिखा यादव ने कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। संवाद