बरेली। बरसात से पहले बिजली लाइनों के आसपास खड़े पेड़ों की टहनियों की छंटाई का दावा इस बार फेल साबित हो रहा है। पीलीभीत रोड, कचहरी, सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, पुराना रोडवेज, कलक्ट्रेट गेट के सामने बिजली के तार पेड़ों की टहनियों में उलझ रहे हैं। मुख्य अभियंता कार्यालय के निकट से ही पेड़ों के झुरमुट के बीच से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। रामपुर बाग स्थित विद्युत निगम कार्यालय के पास भी यही स्थिति है।
शहर के जिन इलाकों से रोजाना डीएम समेत उच्चाधिकारियों का आना-जाना रहता है, वहां भी पेड़ों की छंटाई नहीं कराई गई है। 30 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ की और 30 जुलाई को मुख्य सचिव व डीजीपी की समीक्षा बैठक का भी असर नहीं दिख रहा है। जून-जुलाई में आंधी-बारिश के दौरान 500 से अधिक खंभे गिरे थे और 50 ट्रांसफार्मर खराब हुए थे। निगम ने इस नुकसान से भी सबक नहीं लिया। नतीजा, अब भी आंधी-बारिश के दौरान तार टूटने, शाॅर्ट सर्किट होने और बिजली आपूर्ति ठप होने का खतरा बना हुआ है।
लोग बोले- दावों से परे है हकीकत
हर साल टहनियों की छंटाई के दावे किए जाते हैं, हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता। आंधी-बारिश के दौरान हादसों की आशंका बनी हुई है। - ऋतुराज कुमार, सिविल लाइंस
टहनियां न केवल फॉल्ट की वजह बनती हैं, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा करती हैं। इनकी छंटाई जरूरी है। - मनोज कुमार शर्मा, कटरा चांद खां
वर्जन
टहनियों की छंटाई कराई जा रही है। जिन जगहों पर काम पूरा नहीं हो सका है, वहां भी छंटाई करा दी जाएगी। - ललित कुमार, अधीक्षण अभियंता शहरी