सिविल इंक्लेव का निर्माण कराने के लिए 10 हेक्टेयर जमीन कम पड़ गई। इसीलिए मयूर वन चेतना केंद्र के अलावा राजस्व विभाग की जमीन भी ली जाएगी। बीच-बीच में चकरोड और सड़क आ रहीं हैं, उन्हें भी शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया की ओर से फाइनल प्रोजेक्ट तैयार होने पर सरकारी जमीन नागरिक उड्डयन विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिसमें राजस्व और वन विभाग की जमीन शामिल है। इसकी एवज में वन विभाग को दूसरे स्थान पर जमीन देने के प्रयास होंगे।
एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया के अधिकारियों की टीम दूसरे दिन भी त्रिशूल एयरबेस, मुड़िया अहमद नगर तथा मयूर वन चेतना केंद्र पहुंची। इन स्थानों की जमीनों की नाप जोख की गई, जिसमें तय हुआ है कि प्रस्तावित 10 हेक्टेयर जमीन कम है, इसीलिए कुछ और जमीन की जरूरत होगी। चकरोड और सड़क को भी इसी में प्रस्तावित किया है।
एएआई की टीम का मानना है कि 10 हेक्टेयर में से क ुछ जमीन के स्वामी अपनी जमीन देने में आना कानी कर रहे हैं। ऐसे में दूसरा विकल्प तैयार किया है। साथ में इस इंक्लेव को अपग्रेड करके मिनी एयरपोर्ट का रूप दिए जाने की संभावना के चलते अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था की जा रही है। अब तक तैयार किए गए खाका के अनुसार रनवे, गेस्ट हाउस, रेस्ट हाउस, रोड आदि के लिए भूमि प्रस्तावित कर दी गई है।
‘ सिविल इंक्लेव का निर्माण कराने के लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी जो कि मयूर वन चेतना केंद्र, चकरोड या फिर राजस्व विभाग की अन्य श्रेणी की हो सकती है। एएआई की ओर से फाइनल प्लान मिलने का इंतजार है। उसी के आधार पर शासन को जमीन हस्तांतरण के बारे में प्रस्ताव भेजा जाएगा।’ गौरव दयाल, डीएम