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मान्यता के नाम पर रिश्वतखोरी की जांच करने लखनऊ से पहुंची कमेटी

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बरेली। मान्यता दिलाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप लगाकर राजभवन में की गई शिकायत के तीन साल पुराने मामले में जांच शुरू हुई है। रिटायर्ड जज समेत लखनऊ से पहुंची तीन सदस्यीय कमेटी ने कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय के साथ आरोपों से संबंधित वीडियो देखा। रविवार को आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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राजभवन में तीन साल पुराने मामले को लेकर शिकायत की गई है। आरोप हैं कि विश्वविद्यालय में कार्यरत लिपिक जनार्दन राव और अनिल सिंह ने मान्यता दिलाने के नाम पर एक कॉलेज संचालक से रुपये लिए हैं। यह घटना वीडियो में कैद हो गई है. हालांकि वीडियो में लिपिक सिर्फ रुपये गिनते हुए नजर आ रहे हैं। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर जांच को एक तीन सदस्यीय कमेटी शनिवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंची। कमेटी में रिटायर्ड जज एवं एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर खेमकरन, एग्जीक्यूटिव काउंसिल के ही दूसरे मेंबर बिंद्रा प्रसाद और एडिशनल एडवोकेट जनरल कुलदीपपति त्रिपाठी शामिल हैं। तीनों ने कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय के साथ बंद कमरे में बैठकर आरोपों से संबंधित वीडियो देखी। अब रविवार को आरोपी लिपिक जर्नादन राव और अनिल सिंह के बयान दर्ज किए जाएंगे। वहीं, अनिल सिंह का कहना है कि वीडियो में कोई भी व्यक्ति रुपये देते हुए नजर नहीं आ रहा है, सिर्फ रुपये गिनते हुए वीडियो बनाया गया है। भेजी गई शिकायत में शिकायतकर्ता का नाम भी नहीं है। मगर इस वीडियो को लेकर कुछ लोग उन्हें ब्लैकमेल रहे थे, जिसकी शिकायत उन्होंने तत्कालीन डीएम से की थी। तब आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज करके उन्हें जेल भी भेजा गया था। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उसमें समझौते के लिए ही दोबारा शिकायत करके उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
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