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पॉल साहब को बुलडोजर बोर्ड से पूछकर लाना था...यह बताने नहीं आए पार्षद

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बरेली। डीडीपुरम् में करीब 60 साल पुराने कुष्ठ आश्रम की जमीन मामले की जांच अटक गई है। इस मामले के शिकायतकर्ता पार्षद नोटिस जारी होने के बावजूद जांच अधिकारी एडीएम सिटी के पास नहीं पहुंच रहे हैं। पार्षदों ने शासन में यह शिकायत भेजी थी कि नगर आयुक्त ने बोर्ड में प्रस्ताव पास कराए बगैर ही कुष्ठ आश्रम में बुलडोजर चला दिया। यह बोर्ड के अधिकारों का भी हनन है। एडीएम का कहना है कि एक बार और नोटिस देने के बाद भी शिकायकर्ता नहीं आए तो मौजूदा तथ्यों (जो कमजोर हैं) के आधार पर ही इसकी जांच पूरी कर दी जाएगी।
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नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. कुष्ठ आश्रम की जमीन पर स्मार्ट सिटी के तहत सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट बनाना चाहते हैं। उनके निर्देश पर नगर निगम की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में कुष्ठ आश्रम की जमीन पर कब्जा ले लिया था। इसके विरोध में कुष्ठ रोगियों ने नगर निगम में आकर हंगामा किया था। सुनील खत्री समेत आसपास के कुछ व्यापारी भी कुष्ठ रोगियों के समर्थन में आ गए थे। पुलिस की मौजूदगी में निगम द्वारा लगाए गए सीमेंट के पिलर भी कुष्ठ रोगियों ने उखाड़ दिए। मेयर उमेश गौतम और कुछ पार्षदों ने राज्यपाल को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना कुष्ठ आश्रम की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। इसके पीछे स्मार्ट सिटी के सीईओ सैमुअल पॉल एन. की मंशा बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने की है। मामला गवर्नर हाउस तक पहुंचने के बाद राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव हेमंत राव ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को मामले की जांच रिपोर्ट भेजने के आदेश छह जून को दिए थे। डीएम ने मामले की जांच एडीएम सिटी को सौंप दी। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को नगर आयुक्त ने जवाब भेजा कि चूंकि यह जमीन नगर निगम की है और इस पर अतिक्रमण था। इसलिए अवैध कब्जा हटाने के लिए नगर निगम प्रशासन को बोर्ड में प्रस्ताव पास कराने की कोई जरूरत नही थी। एडीएम सिटी ने बताया कि शिकायतकर्ता वार्ड-74 घेरशेख मिट्ठू के पार्षद सलीम पटवारी और वार्ड-16 संजय नगर अवनेश कुमार को नोटिस भेजा गया था। उसमें दोनों पार्षदों से कहा गया कि उनके पास ऐसे मामले में नगर निगम बोर्ड से प्रस्ताव पास कराने संबंधी कोई पत्रावली है तो वह उसे एक जुलाई को दिखाएं। पार्षद 11 जुलाई तक एडीएम के समक्ष नहीं गए। इसलिए जांच भी पूरी नहीं हो सकी है। एडीएम पार्षदों के न आने पर जो तथ्य फाइल में हैं, उन कमजोर तथ्यों के आधार पर ही जांच आख्या राज्यपाल को भेजने की बात कह रहे हैं।

पार्षद बोले- उस दिन नहीं पहुंचे, फिर बुलाया भी नहीं
पार्षद सलीम पटवारी का कहना है कि वह उस दिन बाहर थे इसलिए नहीं जा सके, फिर एडीएम का कोई बुलावा ही नहीं आया। वहीं, पार्षद अवनेश कुमार का कहना है कि उस दिन उनके भाई अस्पताल में भर्ती थे इसलिए नहीं जा सके। मगर इसके बाद एडीएम ने दोबारा बुलाया ही नहीं।
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पार्षद अपना बयान देने जरूर जाएंगे। अगर एक बार नहीं पहुंचे तो प्रशासन को उन्हें दोबारा बुलाना चाहिए था। अगर कुष्ठ आश्रम मामले की जांच में ढिलाई बरती गई तो जांच अधिकारी एडीएम सिटी की शासन से शिकायत की जाएगी। उमेश गौतम, मेयर
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