जमीन और धान की पैदावार दोनों की ही जांच कर देनी है रिपोर्ट
बरेली। बड़े काश्तकारों ने कहीं फर्जी उत्पादन दिखाकर अपने नाम से छोटे किसानों के धान की बिक्री नहीं कर दी या फिर केंद्र प्रभारियों और माफियाओं की साठगांठ से खरीद घोटाले को अंजाम तो नहीं दिया गया। शासन के निर्देश पर 100 क्विंटल से ज्यादा धान की बिक्री करने वाले किसानों को रडार पर लिया गया है। इसके लिए उनकी जमीन और गाटा संख्या का रिकार्ड चेक करने के साथ यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित काश्तकार ने धान की इतनी पैदावार की भी थी या नहीं।
सरकारी धान खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले शासन में पहुंच रहे हैं। यह शिकायतें भी हुई हैं किा कमीशनखोरी के चक्कर में तमाम बड़े काश्तकार औने-पौने भाव पर खरीदकर कर उसे सरकारी सेंटरों पर बेच देते हैं। इसके लिए सौ क्विंटल से ज्यादा धान की बिक्री करने वाले किसानों की यह जांच कराई जा रही है कि जिन किसानों ने इतनी बड़ी मात्रा में धान बेचा है, उनके पास कितनी भूमि है और उन्होंने उस पर धान की कितनी पैदावार की थी। इसकी क्रास चेकिंग के बाद अगर घपलेबाजी हुई तो उसका पर्दाफाश आसानी से हो सकता है। जिले में 25781 किसान हैं। इसमें 4782 किसानों का सत्यापन होगा है।
किसानों की जांच न करने पर एडीएम ने एसडीएम को भेजे नोटिस
-सौ क्विंटल से ज्यादा धान की बिक्री करने वाले 2341 किसानों के सत्यापन ही नहीं हुए हैं। एडीएम प्रशासन वीके सिंह ने तहसील आंवला में 284, नवाबगंज में 663, फरीदपुर में 936, बरेली में 84, बहेड़ी में 233 और मीरगंज तहसील में 141 किसानों के सत्यापन न किए जाने पर संबंधित एसडीएम को नोटिस भेजा है। एडीएम प्रशासन का कहना है कि किसानों के गाटे नंबर का सत्यापन और किसानों के नाम के मिसमैच होने का जांच एसडीएम को अपनी लॉगिंग से ही करनी है।