शाहजहांपुर। पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद से फिरौती मांगने की आरोपी एलएलएम की छात्रा को 25 नवंबर से शुरू हो रही परीक्षा में शामिल होने जेल से ही जाना पड़ेगा। कोर्ट ने छात्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई को 29 नवंबर की तिथि तय कर रखी है। लेकिन परीक्षा का हवाला देते हुए छात्रा की ओर से पहले सुनवाई को प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया। इधर जिला जेल प्रशासन का कहना है कि किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश के बाद छात्रा को परीक्षा के लिए भेजा जाएगा।
छात्रा की ओर से उसके वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 11 नवंबर को प्रार्थना पत्र दिया, जिसे बुधवार को न्यायाधीश मंजूरानी की कोर्ट में बहस के लिए रखा गया। वकील की ओर से छात्रा के पक्ष में दी गई दलील को कोर्ट ने खारिज करते हुए प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही कहा कि पहले से तय तिथि 29 नवंबर को ही प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होगी। कोर्ट की ओर से प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद छात्रा की परीक्षा कैसे होगी। इस पर छात्रा और उसके परिवार वालों ने अब कानून के जानकारों से राय मशविरा लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को छात्रा से जेल में मिलने उसके वकील पहुंवहीं जेल प्रशासन का कहना है कि जब तक सक्षम अधिकारी आदेश नहीं देता, तब तक छात्रा को जेल प्रशासन अपनी तरफ से परीक्षा देने को नहीं भेज सकता।
बता दें कि छात्रा को कोर्ट के आदेश पर बरेली कॉलेज बरेली में प्रवेश दिलवाया गया। इससे पहले छात्रा चिन्मयानंद के प्रबंधन वाले एसएस लॉ कॉलेज में पढ़ रही थी। कोर्ट ने सुरक्षा के लिहाज से उसका प्रवेश दूसरे कॉलेज में कराए जाने के निर्देश दिए थे। कानून के जानकारों के मुताबिक छात्रा को परीक्षा देने के लिए लोअर कोर्ट में प्रार्थना पत्र डालना होगा। बता दें कि छात्रा चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फिरौती मांगे जाने के मामले में 25 सितंबर से जेल में बंद है।
यदि कोई सक्षम अधिकारी जेल प्रशासन को आदेशित करेगा, तभी छात्रा को जेल से परीक्षा दिलाने के लिए भेजा जा सकता है, अन्यथा नहीं। - राजेश कुमार राय, जेलर