शाहजहांपुर। चिन्मयानंद और छात्रा प्रकरण में एसआईटी के खुलकर नाम लेने के बाद डीपीएस राठौर के घर में सन्नाटा पसरा गया। चर्चा है कि वह अपने बड़े भाई के साथ केंद्र सरकार के एक बड़े मंत्री की शरण में हैं। उनके बड़े भाई भी बड़े पदाधिकारी हैं।
जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन धर्मेंद्र प्रताप सिंह उर्फ डीपीएस राठौर एसआईटी की जांच में शुरूआत से निशाने पर थे। उनसे शुरूआत में भी पूछताछ की गई थी। दिवाली के बाद एक नवंबर को एसआईटी ने डीपीएस से अपने दफ्तर में दो दिन तक पूछताछ की थी। हालांकि दो दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसआईटी चीफ आईजी नवीन अरोरा ने बताया कि छात्रा और संजय के साथ डीपीएस और अजीत सिंह भी राजस्थान के दौसा में थे। उन्होंने चिन्मयानंद की मालिश वाला वीडियो पेन ड्राइव में ले लिया था। कहा था कि यह वीडियो उनके पास जरूरत पर सबूत के तौर पर रहेगा। डीपीएस व अजीत सिंह ने इसी वीडियो के जरिए चिन्मयानंद से सवा करोड़ रुपये मांगे थे।
एसआईटी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद मीडिया ने कचहरी रोड पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास स्थित डीपीएस के घर जाकर देखा तो न तो वह नजर आए और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य। घर का मुख्य दरवाजा खुला था। दरवाजे के सामने उनकी लग्जरी कार भी खड़ी थी। मगर घर के अंदर कोई हलचल नहीं थी। उनके दफ्तर में ताला पड़ा था। डीपीएस के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की तो नॉट रिचेबल था। घर में रात को लाइट भी जलती नहीं दिखी।
अजीत बोले-मुझे जानकारी नहीं
रौसर कोठी स्थित भाजपा नेता अजीत सिंह के घर का भी कुछ ऐसा ही नजारा था। परिवार के कुछ सदस्य अंदर थे। घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था। मोबाइल पर संपर्क किया तो अजीत सिंह ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद नंबर काट दिया और दोबारा कॉल रिसीव नहीं की।