रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थित मंदिर परिसर में छठ पूजा के लिए तैयारियां करते लोग
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इस अवसर पर शहर में लोगों की ओर से घरों में विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। कॉलोनी में एक घर में ही छठ पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के लोग एकत्रित होते हैं और सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं। लोग घरों में टब में जल रखकर पूजा करते हैं। वह इसे आम की पत्तियों, फूलों और रंग बिरंगी लाइटों से सजाते हैं और विधि विधान के साथ पूजा करते हैं।
छठ पूजा का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य कृष्ण के. शर्मा के अनुसार हर साल छठ पूजा दिवाली से छह दिन बाद की जाती है, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सात नवंबर की देर रात 12 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन आठ नवंबर की देर रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में सात नवंबर, बृहस्पतिवार के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा और सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा।
इसलिए होती है छठ पूजा
छठ पूजा का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार जब राजा मनु के पुत्र प्रियव्रत को कोई संतान नहीं हुई तो महर्षि कश्यप के कहने पर उन्होंने महायज्ञ किया। परिणामस्वरूप रानी गर्भवती हुई। मगर दुर्भाग्यवश बच्चे का देहांत गर्भ में ही हो गया। अजन्में शिशु की मौत की खबर सुनकर प्रजा शोक में डूब गई। इसी समय आसमान में छठी मइया प्रकट हुईं। राजा प्रियव्रत की प्रार्थना से उन्होंने बच्चे को जीवित कर दिया। मान्यता है कि तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।