Cheap shops in the city will transport mechanics
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए ने मैकेनिकों को कम रेट पर प्लाट के बजाय बनी हुई दुकानें देने का प्रस्ताव तैयार किया है। मैकेनिक चाहे तो वह बैंक से लोन लेकर अपनी सुविधा के हिसाब से बड़ी या छोटी दुकान खरीद सकते हैं। इसमें दुकान की छत उनकी नहीं होगी। मैकेनिकों को दुकान का केवल अंदर का हिस्सा और उसके सामने वाली जगह ही मिल पाएगी। छत पर बीडीए दूसरी दुकान या दफ्तर बनाकर किसी और को आवंटित करेगा।
ट्रांसपोर्ट नगर न बस पाने के पीछे बड़ी वजह वहां पार्किंग और सड़क के किनारे वाली जमीन पर बड़ी संख्या में मैकेनिकों ने खोखे या टीन शेड लगाकर अनाधिकृत तरह से कब्जा जमाना है। बीडीए के प्लाट महंगे होने की वजह से न तो वह उनको खरीद पा रहे हैं और न ही वहां से हटने को तैयार हैं। मैकेनिकों का आरोप है कि बीडीए ने सस्ती दरों पर प्लाट दूसरों को आवंटित कर दिए। अब उनको महंगी दरों पर वह कहां से प्लाट खरीदें क्योंकि उनकी रोजाना की आमदनी कम है। प्रशासन, बीडीए और मैकेनिकों की कई बार संयुक्त मीटिंगों में भी इस मसले का कभी कोई हल नहीं निकला।
बीडीए ने मैकेनिकों को प्लाट के बजाय दुकानें बनाकर देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत मैकेनिकों को डिमांड पर 50 से दो सौ मीटर की छत समेत दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इनकी लागत 15 सौ रुपये स्क्वायर मीटर होगी। ये दुकानें केवल ग्राउंड फ्लोर पर मिलेंगी। दुकानों की छत बीडीए की होगी। अगर कोई मैकेनिक 50 स्क्वायर मीटर की दुकान खरीदता है तो वह उसे 75 हजार में पड़ेगी। दो सौ मीटर की दुकान तीन लाख में। मैकेनिक चाहे तो वह बैंक से लोन कराकर पैसा किस्तों में चुका सकते हैं। मैकेनिकों को प्लाट चार लाख से लेकर सात लाख तक में पड़ रहा था।
हमने ट्रांसपोर्ट नगर में मैकेनिकों को बनी हुई दुकान देने का प्रस्ताव रखा है। ये दुकानें उनको प्लाट से सस्ती पड़ेंगी। ट्रांसपोर्ट और मैकेनिकों की यूनियन लोगों के आवेदन कराए तो हम उनकी डिमांड पर छह महीने में दुकानें बनाकर दे देंगे ताकि वह अपना कारोबार आराम से करें और ट्रांसपोर्ट नगर बसाने में भी मदद मिले। अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए