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चौबारी मेला सजा,  मुख्य स्नान आज

Mon, 14 Nov 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Chaubari fair punishment, The main bath today - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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रामगंगा तट पर कार्तिक पूर्णिमा मेला रविवार शाम तक पूरी तरह से सज गया। प्रशासनिक तैयारियों के बीच स्नान के लिए घाट भी बना लिए गए। सोमवार को भोर से ही घाट पर स्नान शुरू हो जाएगा। इस बार भी स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं को रामगंगा चौकी के पास से घाट तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया है। श्रद्धालु वाहन वाले पुल के नीचे पूर्वी दिशा में छह सौ मीटर दायरे में बनाए गए घाट पर स्नान करेंगे। रेल मार्ग वाले पुल के नीचे पश्चिमी दिशा को बने परंपरागत घाट पर स्नान प्रतिबंधित रहेगा। यहां पानी अधिक होने की वजह से प्रशासन ने घाट नहीं बनाए हैं। रास्ते में बैरीकेटिंग भी कर दी गई है ताकि श्रद्धालु उस दिशा में न जा सकें।
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स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स के साथ ही 20 गोताखोर भी लगाए गए हैं। पीएसी की नाव भी लगाई गई हैं ताकि डूबने की स्थिति में लोगों को बचाया जा सके। मेला में लाइटिंग की व्यवस्था भी कर दी गई है। मुख्य गेट से लेकर मेले के बीच में कई स्थानों के अलावा घाट तक जाने वाले रास्तों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पूरे मेला में पचास से ज्यादा पुलिस कर्मी और होमगार्ड मुस्तैद रहेंगे। मुख्य स्नान के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है इसलिए रामगंगा तट पर मजिस्ट्रेट और पुलिस के अफसर भी नजर रखेंगे। कई उपनिरीक्षकों को भी लगाया गया है। हालांकि मेला तक आने के लिए लोगों को महेशपुर ठाकुरान के रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम की दिक्कत से जूझना होगा, इसका कोई समाधान नहीं हो सका है। इसके चलते हर घंटे में 20 से 25 मिनट तक जाम लग रहा है। बड़ी तादाद में वाहन जाम में फंसे रहते हैं इसलिए बरेली शहर से आने वाले लोगों को फाटक के इस पार ही वाहन खड़े करके पैदल ही एक किलोमीटर का सफर तय करके मेला में पहुंचना पड़ेगा।

नखासा मेें घुड़दौड़ हुई, लेकिन रौनक घटी
चौबारी मेला के नखासा में रविवार को घुड़दौड़ शुरू हो गई, लेकिन नोटों की कमी की वजह से बिक्री कम है, इसलिए रौनक नजर नहीं आ रही। पूरे दिन घोड़े और घोड़ियों की बिक्री की महसूल महज 30 हजार तक ही हासिल हुई। मेला प्रबंधक जयवीर सिंह ने बताया कि छोटे नोटों की कमी से नखासा में पशु नहीं बिक पा रहे हैं। नखासा आधा भी नहीं रह गया है। यही हाल मेले के बाकी हिस्सों में है। पत्थर के सिल-बट्टे बेचने वाले मैकूलाल बताते हैं कि काफी माल लाने के बाद भी बिक्री नहीं हो पा रही है। लोगों के पास पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट तो हैं, लेकिन छोटे नोट हमारे पास नहीं हैं।
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बहुत ढूंढा खच्चर, नौ हजार में मिला
घोड़े और घोड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन बोझा ढोने वाले खच्चर अब कम मिलते हैं। चौबारी मेला के नखासे में कई जरूरतमंद लोग खच्चर खरीदने आते हैं, लेकिन काफी ढूंढने पर भी नहीं मिलते। रविवार को कृषक राहुल कुमार को एक खच्चर दिखा तो उसे मुंह मांगी कीमत नौ हजार रुपये में खरीद लिया। इसके मालिक तिलहर के शंकर इससे एक पैसा कम लेने को तैयार नहीं हुए। बोले- खेती-किसानी के काम में छोटा-मोटा सामान ढोने के लिए खच्चर से बेहतर कोई साधन नहीं। यह चारा भी कम खाता है और काम ज्यादा करता है।
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