अलीगंज। गैनी गांव स्थित ब्रह्मदेव अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में पुलिस ने डॉ. तेजपाल, आशा कार्यकर्ता ऊषा, शिवानी समेत चार लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। महिला के पति द्वारिका प्रसाद की तहरीर के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
द्वारिका प्रसाद ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 17 अक्तूबर को उसकी पत्नी रिंकू देवी को प्रसव पीड़ा हुई थी। इसके बाद उसने गांव की आशा कार्यकर्ता ऊषा की सलाह पर पत्नी को गैनी स्थित ब्रह्मदेव अस्पताल में भर्ती करा दिया। दोपहर करीब एक बजे प्रसव के दौरान मृत बच्चे का जन्म हुआ। आरोप है कि अस्पताल के डॉ. तेजपाल, आशा कार्यकर्ता ऊषा, वहां काम करने वाली शिवानी और एक अन्य व्यक्ति ने बच्चे का अंतिम संस्कार करने को कहा। इसके बाद द्वारिका प्रसाद ने मृत बच्चे को गांव के पास नदी किनारे दफना दिया। इसके बाद जब वह अस्पताल पहुंचे तो शाम करीब चार बजे पत्नी की हालत ठीक नहीं होने की जानकारी मिली। इसके बाद रिंकू देवी को रेफर किया गया। पति का आरोप है कि उसकी पत्नी की मौत अस्पताल में ही हो चुकी थी।
पीड़ित ने आशा कार्यकर्ता पर पत्नी को कथित तौर पर अवैध अस्पताल में भर्ती कराने, डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसी लापरवाही के कारण पत्नी और नवजात की जान चली गई। आंवला के सीओ हेमंत उपाध्याय ने बताया कि मामले में जांच जारी है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।