बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के गणित विभाग की शोध सहायक शिवांगी वर्मा ने थर्मल बिहेवियर ऑफ सीएनटी-एनहांस्ड सिस्को ब्लड अंडर मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक एंड रेडिएटिव इफेक्ट्स विषय पर शोध किया है। ये अध्ययन रक्त से जुड़ी बीमारियों जैसे कैंसर-ट्यूमर आदि के उपचार में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
शिवांगी के अनुसार, कार्बन नैनो ट्यूब धमनियों में ऊर्जा काे नई दिशा दिखाती है। इस शोध में कार्बन नैनो ट्यूब (सीएनटी) मिले रक्त के बहाव और उष्मास्थानांतरण (हीटिंग इफेक्ट) का गणितीय अध्ययन किया गया है। इसमें सिस्को मॉडल के तहत रक्त में कार्बन नैनो ट्यूब को डाला गया, साथ ही चुंबकीय क्षेत्र भी पैदा किया गया। इससे रक्त के बहाव व ऊर्जा के संचार में फर्क दिखा। कार्बन नैनो ट्यूब में एनर्जी ट्रांसफर बढ़ा पाया गया। रक्त के बहाव में कमी दिखी।
शोध में पाया गया कि कार्बन नैनो ट्यूब की मदद से एनर्जी ट्रांसफर को नियंत्रित कर सकते हैं। खून में कार्बन नैनो ट्यूब मिलाने से उसकी उष्मा चालकता बढ़ जाती है, जिससे तापीय ऊर्जा का स्थानांतरण तेजी से होता है। वहीं चुंबकीय क्षेत्र और रेडिएशन के जरिये शरीर के भीतर खून के प्रवाह और तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है।
मील का पत्थर साबित हो सकती है यह तकनीक
यह तकनीक भविष्य में कैंसर-ट्यूमर के तापीय उपचार (हाइपरथर्मिया), नसों में सटीक दवा पहुंचाने (टारगेटेड ड्रग डिलीवरी) और बायो-मेडिकल उपकरणों के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो सकती है। स्प्रिंगर नेचर प्रकाशन की अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिका जर्नल ऑफ थर्मल एनालिसिस एंड कैलोरीमिट्री में यह शोध प्रकाशित हुआ है। यह शोध-पत्रिका एससीआई जर्नल एवं स्कोप्स के क्यू-1 (टॉप) वर्ग में शामिल है, जिसका इंपैक्ट फैक्टर लगभग 4.2 है।