अन्नू वाल्मीकि और विनीत गोस्वामी बताते हैं कि इस समय लोगों की दिक्कतें जल्दी सुलझ रही हैं। मोहल्ले में कोई बीमार हो जाए और प्रत्याशी को पता चल जाए तो सुबह सबसे पहले वहीं पहुंचते हैं। उन्हें डॉक्टरों के नाम सुझाएंगे, खुद बात कराएंगे और अपनी गाड़ी से अस्पताल तक पहुंचाएंगे। हर तरह की मदद को तैयार है।
कुछ वोटर भविष्यवक्ता भी
चुनावी चकल्लस में कई ऐसे लोग भी शामिल होते हैं कि जो चुनाव की भविष्यवाणी भी करते हैं और रणनीति भी बताते हैं। कौन प्रत्याशी जीतेगा और कौन हारेगाए हारेगा तो क्यों हारेगा और जीत क्यों रहा है। इन सभी के तर्क भी बिंदुवार दिए जाते हैं। राकेश कुमार कहते हैं कि आजकल जो भी आता है शहर के चुनाव पर बात करता है। हालांकिए सब बातें हंसी9मजाक में ही होती हैं। अंत में सब यही कहते हैं कि कोई जीते हमें क्या, हमें तो अपनी यही नौकरी, दिहाड़ी मजदूरी करनी है।