नवाबगंज/फरीदपुर/बहेड़ी/मीरगंज। किसानों ने रबी सीजन की फसलों की बोआई शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक 75 प्रतिशत से अधिक जगहों पर नहरों और माइनरों की सफाई नहीं हो सकी है। इससे नवाबगंज, फरीदपुर, बहेड़ी और मीरगंज में 50 हजार किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को डर है कि पिछले साल की तरह उन्हें इस बार भी अपने निजी संसाधन से सिंचाई का खर्च उठाना पड़ेगा। वहीं, दूसरी ओर नहरों के उबड़-खाबड़ जमीन को समतल नहीं कराया जा सका है।
किसान यूनियन अराजनैतिक के जिला प्रभारी चंद्र प्रकाश ने बताया कि नवाबगंज में 12 नहरें 100 किमी क्षेत्र में हैं। यहां करीब 2500 हेक्टेयर कृषि भूमि पर 25 हजार किसान सिंचाई पर निर्भर हैं। नहरों की सफाई न होने पर इन किसानों ने चिंता जताई है।
राष्ट्रीय किसान मोर्चा के मंडलीय अध्यक्ष राकेश गंगवार ने बताया कि बहेड़ी में 50 से अधिक नहर हैं। इनमें से 20 से 25 किमी लंबी खिरनी नहर, मंडनपुर नहर, रिछा नहर से सिंचाई व्यवस्था पर चार हजार से अधिक किसान निर्भर हैं। हर साल साफ-सफाई होने के बावजूद इन किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसानों को अपने-अपने संसाधनों के सहारे खेती करनी पड़ रही है। इस बार किसानों में उम्मीद जगी थी कि नहरों में साफ-सफाई के बाद स्थिति बेहतर होगी, लेकिन अब सिंचाई की चुनौती बनी हुई है।
पिछले साल तीन करोड़ रुपये हुए खर्च
किसान संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रति बीघा कम से कम 150 से 200 रुपये खर्च होते हैं। पिछले साल में कई किसानों को कमियों के चलते सिंचाई का पानी नहीं मिला। इस तरह इन क्षेत्र में दस हेक्टेयर भूमि पर करीब तीन करोड़ रुपये किसानों को अपने पास से खर्च करने पड़े। नवाबगंज से जेई रघुवेंद्र सिंह ने बताया कि नहरों की सफाई कराई जा रही है। किसानों को टेल तक पानी पहुंचाया जाएगा।
किसानों ने कहा - टेल तक पानी नहीं पहुंचता
बहेड़ी के जिसाई नागर गांव के किसान संदीप सिंह ने कहा कि कई बार तहसील दिवस में नहर की सफाई के लिए लिख कर दिया, लेकिन कुछ नहीं होता। नहर का पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। बिजोरिया के किसान योगेश पाल ने कहा कि अगर नहरों से पानी नहीं पहुंचा तो उन्हें इस बार भी अपने खर्चे पर सिंचाई करनी होगी। फरीदपुर में 15 दिसंबर के बाद से गौसगंज नहर में पानी का आना बताया जा रहा है। नौगवां गांव के इसरार खान ने बताया कि नहर में पर्याप्त पानी न होने की वजह से सिंचाई का फायदा नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि सभी तहसीलों में कई नहरों में कृषि भूमि समतल नहीं है। इससे पानी
जिले में कुल 1100 किमी तक की लंबाई में नहरों की सिल्ट सफाई हो रही है। सिल्ट सफाई का कार्य पिछले एक सप्ताह से शुरू हुआ है जो 30 नंवबर तक चलेगा। इसके बाद दिसंबर के पहले सप्ताह में ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।- सर्वेश चंद्र सिन्हा, अधिशासी अभियंता-रुहेलखंड नहर खंड