विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चा शुरू हो गई है। बरेली, पीलीभीत समेत कई शहरों से संभावित दावेदार लखनऊ पहुंच गए हैं, कई प्रभावशाली नेेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं। मंत्रिमंडल में स्थान पाने के लिए प्रमुख विधायक भरसक जोड़तोड़ कर रहे हैं। कुछ अपने कामकाज के आधार पर जिम्मेदारी मांग रहे हैं।
गुजरात कैडर के आईएएस अरविंद कुमार शर्मा के पिछले दिनों सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद हाईकमान ने उन्हें भाजपा में शामिल कर उन्हें एमएलसी बनवा दिया। इसके बाद अरविंद के किसी महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने की चर्चा शुरू हो गई है। उनका उप मुख्यमंत्री या गृह विभाग में कैबिनेट मंत्री बनना तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसी कारण फेरबदल किया जाना है। मंत्रिमंडल में स्थान भी खाली हैं। चुनावी वर्ष आ रहा है। बरेली, पीलीभीत, मेरठ समेत दर्जन भर से ज्यादा जिलों मेें प्रबल दावेदार काफी दिनों से प्रयासरत भी हैं।
इसके साथ करीब साल भर पुराने मंत्रिमंडल में कई मंत्रियों की कार्यशैली और कामकाज भी विवादित है। संगठन जातीय समीकरण भी मजबूत करना चाहता है। इसी के अनुरूप सप्ताह भर में मंत्रिमंडल में कई लोगों को स्थान मिलना तय है। मंत्रिमंडल में स्थान पाने के लिए कई विधायक लखनऊ पहुंचकर संगठन की नब्ज और अपनी स्थिति का आंकलन कर रहे हैं।
प्रदेश में राज्यमंत्री रह चुके बहोरन लाल मौर्य और शहर विधायक डॉ. अरुण की दावेदारी मजबूत स्थिति में बताई गई है। चर्चा है कि सिंचाई मंत्री पद से हटाए गए धर्मपाल सिंह को भी सम्मान मिल सकता है। पीलीभीत की बीसलपुर सीट से विधायक व पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा भी दौड़ में बताए जाते हैं। चर्चा है कि फिलहाल बदायूं और शाहजहांपुर का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व है। बरेली में भी दो कैबिनेट मंत्री थे जो विवादों के कारण हटा दिए गए थे। कैंट विधायक वित्तमंत्री थे उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देकर मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया था।
मेरठ और आसपास के जाट बहुल क्षेत्र में किसान आंदोलन के चलते वहां त्यागी समाज को प्रतिनिधित्व मिलना तय माना जा रहा है। किठौर से विधायक सत्यवीर त्यागी दौड़ में आगे बताए जाते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने के तमाम विधायकों ने संगठन और संघ नेताओं से संपर्क कर रहे हैं और प्रस्तावित फेरबदल में अपने कामकाज पर जिम्मेदारी चाहते हैं।