बरेली। राजेंद्रनगर, डीडीपुरम, सिविल लाइंस, रामपुर गार्डन, पीलीभीत रोड और सौ फुटा रोड जैसे पॉश इलाकों में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर केबिन कैफे संचालित हो रहे हैं। इनके भीतर प्लाईवुड के छोटे-छोटे केबिन बनाकर उन्हें घंटों के हिसाब से किराये पर उठाया जा रहा है। इनके पास न तो बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की एनओसी है, न ही अग्निशमन विभाग की अनुमति। यहां कभी हादसा हुआ तो बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका से इन्कर नहीं किया जा सकता।
ये कैफे कहीं पहली और दूसरी मंजिल पर तो कहीं अवैध रूप से बेसमेंट में संचालित किए जा रहे हैं। कैफे में अग्निशमन उपकरण भी नहीं हैं। प्लाईवुड के पार्टीशन होने के कारण यहां आग लगने का खतरा बेहद ज्यादा है। यदि कोई हादसा हुआ तो केबिन की संकरी जगह के कारण बाहर निकलने का कोई दूसरा सुरक्षित रास्ता तक नहीं है।
स्कूल और कॉलेज के युवाओं का रुझान इन कैफे की तरफ सबसे ज्यादा है। दोपहर में कॉलेज की छुट्टी के बाद इन जगहों पर भीड़ जुटती है। 500 प्रति घंटे की दर से बुक होने वाले इन केबिनों के साथ कई कैफे संचालक खाने-पीने के कॉम्बो ऑफर भी दे रहे हैं। यहां आने वाले युवाओं से एंट्री के वक्त कोई आईडी प्रूफ भी नहीं लिया जाता।
सोशल मीडिया पर हो रहा प्रचार-प्रसार
केबिन कैफे का धंधा सोशल मीडिया के दम पर फल-फूल रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर फुल प्राइवेसी के नाम पर इनका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर अपलोड की जा रही इन कैफे की रील्स को लाखों व्यूज, लाइक और शेयर मिल रहे हैं। इसके बावजूद न तो बीडीए और न ही पुलिस-प्रशासन इन भ्रामक विज्ञापनों और अवैध गतिविधियों पर कोई संज्ञान ले रहा है। जिम्मेदारों की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
वर्जन
लखनऊ अग्निकांड के बाद लगातार कार्रवाई की जा रही है। जो कैफे प्राधिकरण के नियमों के अनुसार संचालित नहीं हो रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - दीपक कुमार, संयुक्त सचिव बीडीए