बरेली। सफलता के लिए हुनर, लगन, विषम परिस्थितियों के साथ सामंजस्य और धैर्य का होना बहुत जरूरी है। कामयाबी की कुछ ऐसी ही मिसाल डेयरी संचालक के बेटे ने पेश की है। डेयरी में जमा होने वाले गोबर के निस्तारण का विकल्प नालियां नहीं बल्कि खेत हों, यह संकल्प लेकर परधौली के प्रतीक बजाज ने सीए की तैयारी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया। 50 हजार की लागत से शुरू किया कारोबार अब 30 लाख टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
प्रतीक बजाज ने बताया कि जब वह छोटे थे तो कें चुआ पकड़कर क्यारी में डाल देते थे। तब उन्हें पता नहीं था कि यही केंचुए फसलों का उत्पादन बढ़ाने और युवाओं के रोजगार का जरिया हैं। बताया कि उनके परिवार की मिनी बाईपास पर डेयरी थी। इसमें से निकलने वाला गोबर नालियों में बहाया जाता था। इससे बदबू और आए दिन नोकझोंक होती थी। साल 2014 में वह बीकॉम की पढ़ाई के साथ सीए की तैयारी कर रहे थे। मगर वह आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचे। वहां वर्मी कंपोस्ट का प्रशिक्षण लिया। पिता पवन बजाज से 50 हजार रुपये की मदद लेकर छोटी सी यूनिट लगाई। सार्थक परिणाम न मिलने पर खुद रिसर्च शुरू किया।
गोबर के लिए अपनी डेयरी खोली। 2016 में किसानों के वर्मी कंपोस्ट के जरिए उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रयोग किए। दो साल बाद 2016 में उम्मीद नजर आने लगी। साल 2017 में जब वह बीकॉम तृतीय वर्ष में थे तभी पिता से फिर आर्थिक मदद लेकर प्लांट लगाया। तब टर्नओवर दो लाख तक पहुंचा। खाद कम बिक रही थी। मायूस होने लगे तो पिता ने धैर्य बंधाया और सब्र कर हिम्मत रखकर जुटे रहने का सुझाव दिया।
साल 2019 के बाद बदलने लगी स्थिति
बताया कि एमकॉम पूरा होने के दौरान उन्होंने एक फार्मूला खोजा। इससे केमिकल का प्रयोग 50 फीसदी कम होने लगा, जबकि पैदावार 20 फीसदी तक बढ़ गई। कोरोना के दौरान जब हर ओर लोग परेशान थे, जब वर्मी कंपोस्ट में कोई दिक्कत नहीं आई बल्कि मांग बढ़ी। शुरुआत कुछ किसानों से हुई और अब प्रतीक के साथ 1534 किसान जुड़े गए हैं। मांग बढ़ने से उत्पादन भी बढ़ाना पड़ा। गांव में ही बड़ा प्लांट लगा लिया। आसपास के पढ़े लिखे युवाओें को प्रशिक्षित करने लगे। प्लांट पर 17 लोगों को जॉब भी दिया है।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही मकसद
प्रतीक का मानना है कि वह प्लांट से मुनाफा नहीं बल्कि असीमित संभावनाओं से युवाओं को जागरूक करना है, ताकि सभी आत्मनिर्भर बन सकें। उनके मुताबिक अब सलाना उत्पादन 15 सौ टन तक जा पहुंचा है। टर्नओवर 30 लाख रुपये है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र, बिहार तक उत्पाद की आपूर्ति हो रही है। पत्नी वर्तिका बजाज महिलाओं को रोजगार के गुर सिखा रही हैं। अब नगर निगम गोशाला से गोबर लाकर प्रोसेस कर रहे हैं। बायो कंपोस्ट के लिए सेमीखेड़ा फैक्टरी से भी सहयोग ले रहे हैं।