बरेली। ग्रामीण इलाकों में साल दर साल इमारतें खड़ी हो रही हैं। अनियोजित निर्माण रोकने और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के लिए शासन ने वर्ष 2024 में जिला पंचायत से भवनों के नक्शे स्वीकृत कराने की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी यह प्रभावी नहीं हो सकी। जिला पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक केवल 45 भवन स्वामियों ने ही अपने मकानों के नक्शे स्वीकृत कराए हैं। इससे साफ है कि बायलॉज केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है।
जिला पंचायत की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए प्रभावी अभियान तक नहीं चलाया गया। नतीजा, अधिकतर ग्रामीणों को यह जानकारी ही नहीं है कि नए भवन के निर्माण से पहले जिला पंचायत से नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य है। विभाग की ओर से यदि व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए तो इसमें सुधार संभव है।
यह है नियम
300 वर्गमीटर क्षेत्रफल के आवास और दो मंजिल से अधिक का निर्माण कराने पर जिला पंचायत से नक्शा पास कराना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों के तहत भवन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
वर्जन
जिला पंचायत की ओर से गठित टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा स्वीकृति के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। हालांकि, आवेदन काफी कम हुए हैं। नक्शा स्वीकृत नहीं कराने वाले भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। - डॉ. नीतू सिसौदिया, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत