नोटबंदी के बाद बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। रियल एस्टेट से जुड़ी ट्रेडों के कारोबारों का तो बुरा हाल है। घर ही नहीं बन रहे तो सामान कौन खरीदेगा। इसकी वजह से सरिया, सीमेंट, टायल्स, इंटीरियर डेकेरोशन और सेनेटरी के सामान के कारोबारियों की बिक्री 50 फीसदी से भी कम हो गई है। लुभावनी स्कीमों के जरिए घर देने का सपना दिखाने वाले बिल्डरों के शहर छोड़ने पर तमाम व्यापारियों की उधारी के लाखों रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। इससे बाजार में रियल एस्टेट से संबंधित कारोबारियों की दीवाली ही काली हो गई है। बाजार में करीब दस महीने से अचानक आई इस मंदी ने खर्चे कम करने को मजबूर कर दिया है। दीवाली पर लोग अपने घरों की पुताई तक कराने से बच रहे हैं। जल्द ही व्यापारियों को मंदी से कोई सुधार की उम्मीद भी नहीं है।
बाजार विशलेषक सीए आकाश कुमार ने बताया कि नोटबंदी के बाद बाजार से ब्लैक मनी गायब हो गई है। जमीनों के सर्किल प्रशासन ने इतने बढ़ा रखे हैं कि जिन लोगों को बाजार में मकान 20 लाख रुपये से कम में मिल रहा है। उन्हें भी 40 लाख रुपये की कीमत में अपने घर का बैनामा कराना पड़ रहा है। बाजार में मंहगाई लगातार बढ़ रही है। सीमेंट, सरिया, टायल्स कोई भी घर बनाने का सामान सस्ता नहीं है। ऐसे में सस्ता घर कैसे मिल सकता है। सीमेंट पर पहले 16 फीसदी वैट लगता था। अब 28 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। सरिया पर 4 फीसदी वैट था। अब 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। डीजल के रेट और ओवरलोडिंग की वजह से रेता-बजरी मंहगी होती जा रही है। फिलहाल बाजार के हालात भी सुधरने की उम्मीद नहीं है। प्रभा टाकीज पर रेता बजरी का काम करने वाले लिकायत हुसैन ने बताया कि नोटबंदी के बाद हमारा कारोबार तो बर्बाद हो गए। 20 लाख रुपये उधारी में फंसे हुए हैं। हल्द्वानी में किसी क्रेशर पर 100 रुपये क्विंटल से कम रेता-बजरी नहीं है। बरेली आकर किराया जोड़ने के बाद रेता-बजरी 150 रुपये से ज्यादा में रेता-बजरी पड़ रही है।
दीवाली पर भी पेंट नहीं बिक रहा
-सबसे पहले हम नैनीताल रोड पर मनीष कुमार की पेंट की दुकान पर गए। वहां देखा तो कोई ग्राहक नहीं था। उन्होंने बताया कि नोटबंदी से पहले उनका काम बहुत अच्छा था लेकिन अब आधा भी नहीं रहा। दीवाली आने में सिर्फ एक महीना बाकी है लेकिन पेंट की बिक्री नहीं हो रही है। आमदनी कम होने से घर के खर्च पर भी असर पड़ रहा है। कुछ बिल्डरों पर उधारी है, लेकिन उनके फोन नहीं उठ रहे हैं। ऐसे में इस बार दीवाली पर भी कुछ खास नजर नहीं आ रहा है।
कई लोगों ने घर बनवाने बंद कर दिए
-डीडीपुरम साईं जी होम डेकोर के मालिक प्रमोद उपाध्याय का कहना है कि नोटबंदी के बाद उनकी बिक्री आधी रह गई है। उनके पास कई ग्राहक ऐसे थे, जो अपार्टमेंट में रहकर घर बनवा रहे थे, उन्होंने काम रुकवा दिया। पूछने पर कहते हैं किराए पर रहना ठीक है। कारोबार में पैसा लगाना है। हालत सुधरने पर घर बनवा लेंगे। उन्होंने बताया कि जीएसटी से उनकी एक ट्रेड पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। किचिन के सामान पर पहले 5 फीसदी वैट लगता था। अब 38 फीसदी जीएसटी लग रही है। पहले हम ग्राहक को छूट दे देेते थे, अब दे पाने की स्थिति में नहीं है। बृहस्पतिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। देखते हैं बाजार पर क्या असर पड़ता है।
ओवरलोड लाने वाले सस्ता बेच रहे हैं
-नरियावल के अशफाक हुसैन के पास 15 दस टायरा ट्रक थे। यह ट्रक रेता-बजरी उत्तराखंड से लाकर बरेली में बेचते थे। नोटबंदी के बाद कम होकर 12 ट्रक रह गए। ओवरलोड के बाड़ी कटवानी पड़ी। पहले टंकी 360 लीटर की थी, 150 लीटर की करा ली। जो ट्रक चल रहे हैं उनमें 15 टन रेता-बजरी आ पा रहा है। बाजपुर का रेता का 70 रुपये को मिल जाता है, लेकिन वह बिना कागजों से देते हैं। कानूनी रूप से लाने पर 115 रुपये क्विंटल रेता वहीं पड़ रहा है। 45 रुपये क्विंटल का किराया है। 160 रुपये यहां आकर पड़ रहा है। कुछ लोग ओवरलोड रेता-बजरी ला रहे हैं। वह सस्ता बेच रहे हैं।
चाइना से सामान में पैसा फंसाकर फंस गया
-सिकलापुर में शिव इलेक्ट्रीकल की दुकान के मालिक राजेश पांडेय से मिले तो कारोबार की बात करते ही कहने लगे, बुरा हाल है। जब से हम व्यापार में आए हैं, कभी इतना बुरा हाल नहीं देखा। नवरात्र के पहले से ही काम शुरू हो जाता था। बिल्डर इन दिनों में ही नए मकानों में कब्जा देते थे। इसलिए गृह प्रवेश करने से पहले हर व्यक्ति अपने घर में बिजली की सारी नोटबंदी के बाद से बहुत बुरा हाल है। आधे से भी कम काम है। चाइना के माल में पैसा फंसा दिया था। लोग उसे भी लेने नहीं आ रहे हैं।
नवरात्र आने पर कुछ उम्मीद जागी है
-अशोका फोम के पार्टनर विभोर गोयल नोटबंदी के बाद बाजार की स्थिति बहुत खराब है। हम तो कपड़े से लेकर घर सजाने संवारने तक का सारा सामान बेचते हैं, लेकिन किसी ट्रेड का अच्छा हाल नहीं है। बृहस्पतिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं, कुछ उम्मीद हैं। कारोबार की स्थिति खराब होने के साथ बाजार से उधारी का पैसा भी नहीं मिल पा रहा है। दीवाली के मौके पर बाजार में सुधार नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ेंगे। इससे लेनदेन करने वालों के संबंधों में भी कड़वाहट आने की संभावना है।
बाजार के हालत खराब हैं
-इंटीरियर डेकोरेटर रिश्रिता सक्सेना का कहना है कि नोटबंदी के बाद बाजार के हालात अच्छे नहीं है। हर ट्रेड के लोग हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। हम पीवीसी सीट में काम करते हैं। कोठियों और बहुमंजिला इमारतों में हमें काम मिल जाता था, लेकिन भवन निर्माण का काम थमने से बहुत बुरा हाल है। बदायूं में हाल ही मैं एक काम मिला था। उसी को कर रहे हैं। नवरात्र में बरेली के बिल्डरों के हालत सुधरने के बाद की काम मिलने की उम्मीद है।