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शौकीनों ने डट कर उड़ाया मटन चिकन

Thu, 21 Sep 2017 02:12 AM IST
बरेली।
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मीट की दुकान
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पितृ पक्ष में 15 दिनों से तरस रहे शौकीनों को बुधवार को सिर्फ 13 घंटों की मोहलत मिली और इतने में ही उन्होंने मीट मार्केट के कारोबार का ग्राफ 20 फीसदी उड़ाकर 50 फीसदी पर पहुंचा दिया। शौकीनों की भीड़ के कारण दो हफ्तों से सन्नाटे में डूबे शहर के मांसाहारी होटलों पर बुधवार को जबर्दस्त रौनक दिखाई दी थी। नवरात्र की पाबंदियां शुरू होने से पहले मौका मिला तो लोगों ने यहां डटकर मटन-चिकन उड़ाया। हालांकि कच्चे मीट के फुटकर बाजार में सन्नाटा रहा, यानी लोगों ने घरों पर मीट बनाने से फिर भी परहेज किया।
पितृ पक्ष के दौरान ग्राहकों की कमी के चलते मांसाहारी होटलों में सन्नाटे जैसा माहौल था। इन दो हफ्तों के दौरान मीट बाजार का कारोबार नीचे गिरकर 20 प्रतिशत पर पहुंच गया था। मटन और चिकन दोनों की बिक्री जबर्दस्त ढंग से प्रभावित हो गई थी, लेकिन बुधवार को एकाएक इस कारोबार में बूम आया और बिक्री का ग्राफ कहीं 30 तो कहीं 50 फीसदी तक पहुंच गया। होटल कारोबारियों के मुताबिक मटन का कारोबार तो 10-15 प्रतिशत तक ही बढ़ा लेकिन चिकन के कारोबार में इन 13 घंटों में ही 25-30 फीसदी तक वृद्धि हो गई।
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कारोबारियों के मुताबिक बुधवार को मटन का थोक कारोबार आम दिनों के मुकाबले अनुमानित तौर पर पांच लाख से ऊपर निकल गया जबकि चिकन का थोक कारोबार औसतन 2 करोड़ 53 लाख रुपये का माना जा रहा है। हालांकि कारोबारियों कहना है कि यह बूम सिर्फ एक ही दिन के लिए ही था। बृहस्पतिवार से नवरात्र शुरू होने के बाद मीट कारोबार पितृ पक्ष से भी नीचे गिर जाएगा।  

ॎ कनागत और नवरात्र को मिला कर लगभग पूरे महीने मीट कारोबार की स्थिति बहुत खराब रहती है। खास तौर से पूरे नवरात्र में मटन कारोबार तो मात्र 5 से 10 प्रतिशत ही रह जाता है। - वसीम सकलैनी, मटन के थोक कारोबारी  
कनागत और नवरात्र पर मीट कारोबार में काफी गिरावट रहती है। कनागत में तो फिर भी 20-25 प्रतिशत तक कारोबार चलता रहता है लेकिन नवरात्र में यह और घटकर लगभग 10 प्रतिशत ही रह जाता है। - जाहिद, चिकन व्यापारी 
आम दिनों के मुकाबले पिछले 15 दिनों से जो दुकानदारी 20 से 25 प्रतिशत चल रही थी, वह बुधवार को करीब 50 प्रतिशत पहुंच गई। लोगों ने खाया भी और काफी लोग पैक कराकर घर भी ले गए। -मोहम्मद शादाब, होटल स्वामी 

शराब दुकानों पर भी भीड़, 30 फीसद बढ़ी बिक्री
बरेली।
श्राद्ध और नवरात्र के बीच सिर्फ चंद घंटों का समय मिला तो मदिरा प्रेमियों की शराब की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी। एक ही दिन में शराब की सामान्य से तीस प्रतिशत ज्यादा बिक्री होने का अनुमान जताया जा रहा है। बुधवार दोपहर बाद बार और रेस्त्राओं में ग्राहकों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। दो सप्ताह से श्राद्ध चल रहे थे, इसलिए शराब कारोबार भी गिर गया था। नवरात्र शुरू होने से पहले थोड़ा मौका मिलते ही मदिरा प्रेमी शौक पूरा करने में जुट गए। देर रात तक शराब की दुकानों पर भीड़ लगी रही। कारोबारी जमाल सिद्दीकी ने बताया कि श्राद्ध और नवरात्र में कारोबार 30-40 प्रतिशत तक गिर जाता है। लेकिन बुधवार को इसमें अचानक तीस प्रतिशत तक वृद्धि हो गई। अब फिर दस दिन तक शराब और बार में सन्नाटा छाया रहेगा। पहली अक्टूबर को फिर बिक्री बढ़ेगी लेकिन दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर फिर शराब की दुकानें बंद रहेंगी।
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श्राद्ध और नवरात्र के बीच मांस वर्जित
आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि श्राद्ध और नवरात्र के बीच मांस शराब आदि का सेवन वर्जित होता है। अगर कोई ऐसा करता है तो अपने पितरों को जाते-जाते नाराज कर देता है। दूसरे दिन ही देवी का आगमन होना होता है। मान्यता है कि किसी भी अतिथि के आने पर स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान रखा जाना चाहिए, नवरात्र में तो घर-घर देवी विराजती हैं, ऐसे में मांस कैसे खाया जा सकता है। वैसे भी खाना कम से कम 48 घंटे में पचता है। लिहाजा मांस खाने वाले की नवरात्र न आत्मा शुद्ध रहती है, न ही शरीर। 
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