मजहब की बंदिशों से आजाद पूरे मुल्क में थी हसनी मियां के मुरीदों की तादाद
उमराव जान रिलीज होने से पहले दुआ कराने आए थे निदेशक मुजफ्फर अली
रविंद्र जैन, गुलाम हुसैन खां, सखावत हुसैन और सलीम अहमद भी थे मुरीद
बरेली। मजहब की बंदिशों से आजाद हसनी मियां के मुरीदों की तादाद मुल्क में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी थी। बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियों का उनसे काफी लगाव था जो अक्सर खानकाह नियाजिया के दर पर हाजिरी देने भी आती रहती थीं। अस्सी के दशक में फिल्म उमराव जान रिलीज होने से पहले उसके निदेशक मुजफ्फर अली ने खानकाहे नियाजिया में हाजिरी देने के बाद हसनी मियां से फिल्म की कामयाबी के लिए दुआ कराई थी।
प्रख्यात संगीतकार रवींद्र जैन का नाम भी हसनी मियां के मुरीदों में शामिल है। उन्होंने खानकाह आकर हाजिरी देने के बाद हसनी मियां का आशीर्वाद लिया था। 90 के दशक में रामपुर घराने के शास्त्रीय संगीत के अंतर्राष्ट्रीय कलाकार गुलाम हुसैन खां, सखावत हुसैन खां और सलीम अहमद खां खानकाह में पहली बार अपना कलाम पेश करने आए थे। हसनी मियां से वे इतने प्रभावित हुए कि कई साल तक खानकाह में हाजिरी देने आते रहे। हाजिरी देने के साथ हसनी मियां से मुलाकात भी तय होती थी। वर्ष 2000 के शुरूआती दौर में जब फिल्म अभिनेता शाहिद कपूर का करियर की डगमगा रहा थी तो उनकी मां शहनाज ने भी बेटे के लिए यहां आकर मन्नत मांगी थी और हसनी मियां से दुआ कराई थी। शाहिद कपूर की गिनती इसी के बाद कामयाब कलाकारों में शुरू हुई।
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मशहूर संगीतकार ए आर रहमान ने भी 2008 में खानकाह पर हाजिरी देकर हसनी मियां से मुलाकात की थी। सूफियाना गायक सुल्तान खां दरगाह पर अक्सर हाजिरी देने आते थे और हसनी मियां से मिलते थे। अपनी मशहूर अलबम ‘पिया बसंती’ के लांच पर भी वह यहां आए थे। उनका कहना था कि हसनी मियां के पास बैठ कर उन्हें रूहानी सुकून हासिल होता है। इसके अलावा फिल्म अभिनेता मनोज वाजपेयी और राजकुमार राव 2013-2014 में अपनी फिल्म अलीगढ़ की शूटिंग के दौरान खानकाह पर हाजिरी देने पहुंचे थे और हसनी मियां से आशीर्वाद भी लिया था।