देश-दुनिया में मशहूर बरेली के मांझा कारोबार संकट के दौर से गुजर रहा है। चीनी मांझे की बढ़ती मांग और खपत यहां के देसी कारोबार को जख्म दे रहा है। सड़कों पर उड़ता यह खूनी मांझा कई शहरवासियों को भी लहूलुहान कर चुका है। पिछले साल सात फरवरी को बाकरगंज में चीनी मांझे के निर्माण के दौरान बारूद व शीशे का मिश्रण तैयार करते वक्त विस्फोट होने से कारखाना मालिक और कारीगरों समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले भी इस तरह के धमाकों में कारीगरों की जान जा चुकी है।
चीनी मांझे की बढ़ती मांग और पुलिस प्रशासन की सख्ती की वजह से असली देसी कारोबार फीका पड़ने लगा है, जबकि दुकानों पर खूनी मांझा खामोशी से बिक रहा है। इसके बावजूद इस धंधे से जुड़े कारीगर देसी मांझा बनाने का मोह छोड़ नहीं पाते। ईदगाह के आसपास के इलाके में बनाए जाने वाले मशहूर देसी मांझे की बिक्री देश के विभिन्न राज्यों सहित अमेरिका, लंदन, दुबई आदि देशों तक की जाती है।
लखनऊ में ओवरब्रिज पर जा रहे युवक सैयद शोएब की चीनी मांझे से गर्दन की नस कट गई। इससे उसकी तड़पकर मौत हो गई। अब सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि चीनी मांझे से होने वाली मौत हत्या मानी जाएगी। शहर में भी चीनी मांझा धड़ल्ले से बिकता है। यह दीगार बात है कि पुलिस को दिखता नहीं। ऐसे में सीएम के आदेश से चीनी मांझा के तस्करों में दहशत का माहौल है। शहर के बारादरी, कोतवाली और किला क्षेत्र में चीनी मांझे की खपत होती है।
चार दशक से देसी मांझा बना रहे कारीगर
बाकरगंज में ईदगाह के पास अड्डा लगाकर मांझा बना रहे कारीगर अब पुलिस व मीडिया को देखकर सहम जाते हैं। यहां मिले कय्यूम ने बताया कि वह चार दशक से यही काम कर रहे हैं। मांझे में इस्तेमाल होने वाली सूती डोर, चरखी व अन्य सामान काफी महंगा हुआ है। इस लिहाज से एक चरखी करीब नौ सौ रुपये में तैयार होती है। इसमें सात रील होती हैं। इसे वह थोक में 1800 रुपये की बेचते हैं। यानी कि हजार रुपये की बचत दो से तीन लोगों में बंटती है।
एक दिन में एक चरखी ही बन पाती है। यह काम भी धूप निकलने पर ही संभव होता है। साठ साल के कारीगर अमीर अहमद ने बताया कि बरेली के मांझे की दुबई तक मांग है। चीनी मांझे ने उनके धंधे को बदनाम किया है। नायलॉन की डोर पर हाथ से कोई कोटिंग हो ही नहीं सकती। यह मांझा बाहरी शहरों की फैक्टरियों से गुपचुप शहर की दुकानों तक लाया जाता है। इस पर पूरी तरह बंदिश लगे तो उनके धंधे में बरकत हो सकती है।
डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि छह फरवरी से दस दिन तक रेंज के चारों जिलों में अभियान चलाया जाएगा। सिंथेटिक, शीशा लेपित, नायलॉन डोरी व चीनी मांझे की तलाश की जाएगी। इनका निर्माण, भंडारण, उपयोग व बिक्री करने वालों की गिरफ्तारी कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले महीने ही किला पुलिस ने बाकरगंज के अब्दुल रजा, शादाब, अजीम और उवैश खां को चीनी मांझे की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनके पास से पुलिस ने चीनी मांझे की चार चरखियां बरामद की थीं। इन चारों ने बताया था कि चीनी मांझे की चरखी बाहर से लाकर ऊंचे दाम पर शहर में बेचते हैं। अब अभियान के तहत पुलिस पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपियों का सत्यापन कर सकती है।
कब-कब हुईं घटनाएं
- 26 जून को कुतुबखाना पुल पर बाइक सवार छात्र की गर्दन और हाथ में मांझा लिपट गया था। इससे वह बाइक समेत सड़क पर गिरकर घायल हो गया था।
- पांच जून को चीनी मांझे से पूर्व पार्षद सूर्य प्रकाश गुप्ता की गर्दन में घाव हो गया था। वह लहूलुहान होकर पुल पर गिर गए थे। राहगीरों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया था।
- 10 मई को शाहजहांपुर रोड पर बाइक सवार ज्ञानरत्न व उनकी पत्नी शुभा चीनी मांझे की चपेट में आकर घायल हो गए थे। उनकी गर्दन व चेहरे पर जख्म हुए थे।
- दो मार्च को सिविल लाइंस स्थित हनुमान मंदिर के पास मांझे की चपेट में आने से स्कूटी सवार महिला घायल हो गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
- 25 फरवरी को नॉर्थ सिटी निवासी फार्मा व्यवसायी पवन सक्सेना की बेटी साक्षी सक्सेना खतरनाक मांझे की चपेट में आकर जख्मी हो गई थी।
- 17 फरवरी को फाइनेंस कंपनी कर्मचारी चीनी मांझे की चपेट में आने से घायल हो गया था। उसकी भी गर्दन में घाव हो गया था।