14 को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अमर उजाला परिसर में लगेगा रक्तदान शिविर
बरेली। अगर किसी मरीज को ब्लड के निगेटिव चार ग्रुप में से किसी भी ग्रुप का ब्लड चाहिए तो तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों या फिर दूसरे जिलों में दौड़ लगानी पड़ सकती है, क्योंकि लॉकडाउन के वक्त में ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। ऐसे में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से जिला अस्पताल के सहयोग से 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस पर सुबह आठ बजेे से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, ताकि दूसरों की जान बचाने के लिए हर बार की तरह इस बार भी शहरवासी बढ़चढ़कर रक्तदान कर सकें।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. यूवी सिंह का कहना है कि कोरोना की वजह से पिछले चार महीनें में गिने चुने लोग ही रक्तदान करने आ रहे हैं। मगर, अब स्थिति और भी खराब हो गई है। ब्लड बैंक में फिलहाल 46 यूनिट ही खून बचा है, जबकि ब्लड बैंक में 150 यूनिट से ज्यादा ब्लड रखने की क्षमता है। आशंका जताई कि अगर किसी विशेष परिस्थिति में ज्यादा लोगों को खून की आवश्यकता पड़ गई तो तीमारदारों को भारी दिक्कत हो सकती है। लिहाजा लोगों से अपील की जा रही है कि वे बढ़चढ़कर रक्तदान करें, ताकि जरूरत पड़ने पर दूसरों की जान बचाई जा सके। उन्होंने बताया कि ए, बी, ओ और एबी पॉजिटिव ब्लड सिर्फ 45 यूनिट ही शेष है। ओ निगेटिव ब्लड तो सिर्फ एक यूनिट ही बचा है।
रक्तदान से पवित्र होता है शरीर
धन पवित्र सेवा करि, तन पवित्र करि रक्तदान, मन पवित्र हरि भजन करि, अंत समय नेत्रदान। इसमें भी रक्तदान को महादान कहा गया है, क्योंकि यह ऐसा दान है जो जरूरतमंद की दुआएं दिलाने के साथ ही, शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है।
एक यूनिट रक्त से बचती हैं चार जिंदगियां
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप का कहना है कि रक्तदान करने से सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि उस एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है, क्योंकि जब एक यूनिट ब्लड के चार हिस्से कर दिए जाएं तो रेड ब्लड सेल और व्हाइट ब्लड सेल अलग-अलग हो जाएंगे। प्लाज्मा भी अलग हो जाएगा, इसके बाद वह ब्लड चार लोगों के काम आ सकता है। लगातार रक्तदान करने से कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा दूर रहता है। रक्तदान से खून में कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होता।
डायबिटिक भी कर सकते हैं रक्तदान
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रविश अग्रवाल ने बताया कि यह भ्रम ही है कि डायबिटिक लोग रक्तदान नहीं कर सकते हैं। ऐसा सिर्फ उन स्थितियों में होता है जब व्यक्ति इंसुलिन पर निर्भर हो। अगर किसी व्यक्ति का शुगर लेवल 225 तक है और वह इंसुलिन नहीं लेता है तो वह रक्तदान कर सकता है। इसके अलावा अगर किसी की शुगर ज्यादा है तो उसका रक्त किसी ऐसे इंसान को ही चढ़ाया जाता है जिसे शुगर की समस्या हो। हालांकि, इस मामले में रक्तदान से पहले चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है।
कौन-कौन बन सकता है रक्तदानी
एक स्वस्थ व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच हो। उसका हीमोग्लोबिन 12.5 प्रतिशत से ज्यादा हो और कम से कम 45 किलोग्राम वजन हो। अगर किसी व्यक्ति की शुगर 225 तक है और वह इंसुलिन नहीं लेता है तो वह भी रक्तदान कर सकता है।
रक्त के संबंध में जानकारी
- शरीर में कुल वजन का सात प्रतिशत हिस्सा रक्त होता है।
- रक्तदान में सिर्फ 350 मिलीलीटर रक्त निकाला जाता है।
- 350 मिलीलीटर खून तीन से चार जिंदगियां बचा सकता है।
- 24 घंटे में ही फिर से शरीर में रक्त की कमी पूरी हो जाती है।
- देश में हर साल करीब चार करोड़ यूनिट खून की जरूरत पड़ती है।
- प्रचार-प्रसार आदि के बाद भी सिर्फ पांच लाख यूनिट रक्त ही मिल पाता है।
- सर्वे के मुताबिक 25 फीसदी लोगों को जीवन में रक्त की जरूरत पड़ती है।
नियमित रक्तदान के फायदे
- शरीर में खून बनने की प्रक्रिया तेज होती है।
- रक्तदान से पहले जांच में शरीर की स्थिति पता चलती है।
- रक्तदान के बाद होने वाली खून की जांच में एचआईवी, एचवीएसजी, एचसीबी, वीडीआरएल, मलेरिया का पता चलता है। इनकी रिपोर्ट निगेटिव होने पर ही रक्त का उपयोग किया जाता है। पॉजिटिव मिलने पर रिपोर्ट की गोपनीयता बरकरार रखते हुए रक्तदाता को इसकी जानकारी दी जाती है।
यह नहीं कर सकते हैं रक्तदान
एनीमिया, कैंसर, टीबी से ग्रसित व्यक्ति, किडनी रोग और हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव, लीवर के मरीज, माह भर में अगर टीकाकरण कराया हो, लगातार कई दिनों से एंटीबॉयोटिक या एस्प्रिन दवा का सेवन करने वाले और गर्भवती महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकती हैं।
ब्लड बैंक में मौजूद ब्लड यूनिट
ग्रुप पॉजिटिव यूनिट
ए 14
बी 12
ओ 10
एबी 09
ग्रुप निगेटिव
ए 00
बी 00
ओ 01
एबी 00