रुहेलखंड में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। पीलीभीत के पूरनपुर से मंगलवार को भेजे गए मुर्गियों के सैंपल में आईवीआरआई लैब में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इससे पोल्ट्री फार्म संचालकों के साथ केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के वैज्ञानिकों की भी चिंता बढ़ गई है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की लैब ने बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए सैंपलों की जांच बढ़ा दी है। यहां यूपी और उत्तराखंड के साथ ही अन्य प्रदेशों से भी सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। मंगलवार को पीलीभीत के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) ने पूरनपुर के शेरपुर से मुर्गियों के करीब 50 सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई लैब में भेजे थे।
लैब प्रभारी डॉ. वीके गुप्ता ने इन सैंपल में बर्ड फ्लू के संक्रमण की पुष्टि की है। उनका कहना है कि रुहेलखंड और उसके आसपास के क्षेत्र में बर्ड फ्लू का यह पहला केस सामने आया है।
इसकी रिपोर्ट आईवीआरआई के उच्चाधिकारियों के साथ पीलीभीत के सीवीओ को भी भेजी गई है। इधर, रुहेलखंड में बर्ड फ्लू का मामला सामने आने के बाद सीएआरआई ने सतर्कता बढ़ा दी है।
संस्थान में मौजूद विभिन्न दुर्लभ प्रजाति के करीब 40 हजार पक्षियों को संक्रमण से बचाने के लिए बुधवार को उनकी शेड तक पहुंचने वाले सभी रास्ते बंद कर केवल एक रास्ते को ही खुला छोड़ा है। आवागमन के दौरान संक्रमण रोकने के लिए वहां भी कई बार दवा का छिड़काव किया जा रहा है।
संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि पक्षियों को संक्रमण से बचाने के लिए और सतर्कता बढ़ाई जाएगी। इसको लेकर गुरुवार को वैज्ञानिकों की बैठक भी बुलाई गई है।
आईवीआरआई के बर्ड फ्लू लैब प्रभारी डॉ. वीके गुप्ता ने कहा कि पीलीभीत के पूरनपुर से मुर्गियों के कुछ सैंपल वहां के सीवीओ ने भेजे थे। जांच में उनके सैंपल बर्ड फ्लू संक्रमित पाए गए हैं। रुहेलखंड और उसके आसपास के क्षेत्र में यह पहला केस है।