बरेली। बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) ने अपने यहां से चूजे और मुर्गों की बिक्री पर रोक लगा दी है। यहां से केवल मुर्गे का मीट और अंडों की बिक्री ही होगी। इसके अलावा पक्षियों को संक्रमण से बचाने के लिए संस्थान ने परिसर में निगरानी और बढ़ा दी है। सोमवार को सीएआरआई निदेशक ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर इसकी कार्ययोजना तैयार की।
सीएआरआई में हर दिन बड़ी मात्रा में जिंदा चूजे और मुर्गों की बिक्री होती है। पोल्ट्री फार्म के लिए यहां के जिंदा मुर्गे और चूजों की माफी मांग रहती है। इसमें मुर्गों की हाईब्रिड प्रजाति भी शामिल हैं मगर बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ता देखते हुए सीएआरआई ने सतर्कता बढ़ाते हुए मुर्गे और चूजों की बिक्री पर रोक लगा दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संस्थान में अभी तक किसी पक्षी में संक्रमण या उसके लक्षण नहीं मिले हैं लेकिन यहां से खरीदकर ले जाने के बाद किसी दूसरे पक्षी के संपर्क में आकर संस्थान के पक्षी के संक्रमित होने का खतरा है। हालांकि संस्थान ने अपने काउंटर से अंडा और मुर्गे के मीट की बिक्री जारी रखने का फैसला लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संस्थान में अभी बर्ड फ्लू का एक भी मामला नहीं है। इसलिए अंडा और मुर्गे के मीट बिक्री से कोई खतरा नहीं है।
वैज्ञानिकों ने दूसरी जगहों से मुर्गों का आयात न करने की दी सलाह
सीएआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी रुहेलखंड मेें बर्ड फ्लू का कोई केस नहीं है मगर दूसरे जगहों और प्रदेशों में बर्ड फ्लू के मामले मिलने के बाद संक्रमण का खतरा बना हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पोल्ट्री फार्म संचालक इस पर खास तौर से ध्यान रखे, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
सीएआरआई के रास्तों पर किया गया दवा का छिड़काव
सीएआरआई में करीब चालीस हजार विभिन्न प्रजाति के पक्षी है। लोगों के आवागमन से पैरों के माध्यम से इन पक्षियों तक संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। इसे रोकने के लिए सीएआरआई अपने परिसर के सभी रास्तों पर दवा का छिड़काव करा रहा है। निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर पक्षियों के शेड केे पास निगरानी और तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बाहरी पक्षी यहां तक न आ सके। साथ ही पक्षियों के मरने पर भी विशेष सतर्कता रखने को कहा गया है।
‘बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए सीएआरआई ने जिंदा चूजे और मुर्गों की बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया गया है कि वे संस्थान के पक्षियों पर निगरानी रखे।’ - डॉ. संजीव कुमार, निदेशक, सीएआरआई