बरेली। 2017 के चुनाव से ऐन पहले भाजपा में शामिल होकर बिल्सी का टिकट हासिल करके विधायक बनने में कामयाब हुए राधाकृष्ण शर्मा उर्फ आरके शर्मा ने सरकार का कार्यकाल पूरा होते ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सोमवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें सदस्यता दिलाई। आरके शर्मा ने आंवला सीट से टिकट मांगा है।
दरअसल, आरके शर्मा के भाजपा छोड़ने के कयास करीब दो महीने पहले से ही लगाए जा रहे थे। पिछले महीने आरके शर्मा और आंवला के भाजपा विधायक धर्मपाल की बातचीत का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें धर्मपाल से आरके शर्मा यह कहते हुए दिख रहे थे कि इस बार वह उनके मुकाबले ही चुनाव लड़ेंगे, भले ही उन्हें निर्दलीय आना पड़े। हालांकि बाद में दोनों ने इसे मजाक की बात कहकर टाल दिया था।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में बदायूं पहुंची भाजपा की जन विश्वास यात्रा में भी वह शामिल नहीं हुए तो उनके भाजपा छोड़ने की संभावना को और बल मिला। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की बदायूं में हुई जनसभा में भी आरके शर्मा शामिल नहीं हुए तो यह तय माना जाने लगा कि वह पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं।
बसपा से भाजपा और अब सपा
आरके शर्मा पहली बार 2007 में बसपा के टिकट पर आंवला से चुनाव लड़कर विधायक बने थे। इत्तफाक यह कि इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी धर्मपाल सिंह को ही हराया था। आंवला विधायक रहते हुए उन पर लगातार निष्क्रियता के आरोप लगते रहे। आरके शर्मा का आंवला में आना-जाना भी कम ही होता था। 2012 में बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें टिकट नहीं दिया। लिहाजा वह चुनाव नहीं लड़ पाए। 2017 में चुनाव से तीन महीने पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। बिल्सी से उन्हें टिकट भी दे दिया गया और वह फिर विधायक बन गए। हालांकि बिल्सी में भी उन पर आंवला की ही तरह निष्क्रिय रहने का आरोप लगा।
आंवला सीट पर बदल सकते हैं कई और समीकरण
आरके शर्मा के सपा में शामिल होने के बाद आगे आंवला सीट पर और कई समीकरण बदलते दिखाई दे सकते हैं। माना जा रहा है कि अंतिम तस्वीर प्रमुख राजनीतिक दलों के टिकटों की घोषणा पर निर्भर करेगी। राजनीतिक हलकों में ऐसी सूचनाएं मजबूती से उभर रही हैं कि आंवला में और कई नेता इधर से उधर हो सकते हैं।