श्रीमद्भागवत कथा का बखान करतीं शिवांगी।
बरेली। कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में, व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाएं। अन्यथा यह कथा केवल ‘मनोरंजन’ तक ही सीमित रह जाएगी। यह उद्गार कथा व्यास शिवांगी ने तीसरे दिन की श्रीमद्भागवत कथा में व्यक्त किए।
कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से मन का शुद्धीकरण हो जाता है। इससे संशय दूर होता है। शंाति और मुक्ति मिलती है, इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है। मोहल्ला बिहारीपुर कहरवान में श्रीमद्भागवत कथा 12 दिसंबर से रोजाना अपराह्न दो बजे से शाम पांच बजे तक हो रही है। कथा को 18 दिसंबर को पूर्ण विश्राम दिया जाएगा। आयोजन में ब्रजेश शर्मा, चंदू, जुगजुग, चांदनी सक्सेना, अनुराग सक्सेना का सहयोग रहा। ब्यूरो