शशांक ने कोतवाली पुलिस को बताया कि उसके पिता जितेंद्र कुमार इज्जतनगर मंडल से रिटायर्ड रेलवे टेक्नीशियन हैं। उन्होंने नंदनवन में अपना मकान बनाया है। वह काफी समय से सिविल सर्विसेज और अन्य परीक्षाएं दे रहा है। वर्ष 2016 में पीसीएस के इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन फेल हो गया।
इसके बाद उसने सोचा कि वह अफसर तो नहीं बन पाएगा पर अफसर जैसा रौब गांठने में क्या बुराई है। तब से वह इस तरह अफसरों से मुलाकात करने लगा। उसने बरेली के कई और अफसरों से पहले फोन पर बात करना कबूल किया पर क्या काम कराए, इस बारे में जानकारी नहीं दी।
बताया, फिलहाल कमिश्नर से औपचारिक भेंट करने गया था। जान पहचान होने के बाद वह उनसे कोई काम कराने की कोशिश करता पर इससे पहले ही पकड़ गया।
लोग मानते थे आईएएस, डॉक्टर की उपाधि भी फर्जी
कोतवाली पुलिस ने आरोपी के पड़ोसियों और परिचितों से जानकारी ली तो पता लगा कि तमाम लोग उसे ट्रेनी आईएएस या अधिकारी ही समझते हैं। वह लोगों के साथ उसी गरिमापूर्ण तरीके से बात करता था।
लोगों को अहसास नहीं था कि वह फर्जीवाड़ा करता है। प्रभाव डालने के लिए ही वह नाम के आगे डॉक्टर लगाता है। लोग उसे पीएचडी उपाधि धारक समझते थे पर वास्तव में उसके पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है।
एसएसपी शैलेश पांडेय ने बताया कि कमिश्नर कार्यालय से मिली शिकायत के आधार पर शशांक तिवारी नाम के व्यक्ति को पकड़ा गया है। वह खुद को 2013 बैच का आईएएस बता रहा है, जबकि उस बैच में इस नाम का कोई अधिकारी नहीं है। वह ऐसा क्यों कर रहा था और पहले क्या कारनामे कर चुका है, इस बारे में उससे पूछताछ की जा रही है। रिपोर्ट दर्ज कर ली है, कोतवाली पुलिस उसका चालान करेगी।